नया साल नयी सोच..

नया साल यानी नए ख्याल |

        नए  ख्याल यानी नयी सोच |

                 नयी सोच वह जो ज़िन्दगी बदल दे |

इस नए साल में हम कुछ ऐसा करें कि हमारी ज़िन्दगी बेहतर से बेहतरीन बन सके  |

इसके लिए हमें सिर्फ इतना सोचना है कि हमारा आने वाल साल बीते साल से बेहतर हो |

यह जो दिसम्बर का महिना है, यह एक तरह का आईना है जो दिखाता है कि पुरे साल हमने क्या खोया ….क्या पाया |

और दूसरी तरफ जो आने वाला जनवरी का महिना है, वो दिखाता है एक सुनहरा सपना | सच, हमलोग आने वाले साल भर के लिए एक सपना संजोते है |

आइये पहले हम आईना देखें और बीते साल का विश्लेषण करें |

मेरा मतलब है कि बीते साल हमारे लिए कैसा रहा .. हमने क्या खोया और क्या पाया |

इससे हम इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते है कि बीते साल में क्या क्या कमियाँ रही और क्यों हम अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाए.| .

इस साल कौन से आवश्यक सुधार किये जाएँ ताकि आने वाले साल में हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके |

अपनी कमजोरी को स्वीकार करने की हिम्मत और उसमे सुधार करने की नियत होनी चाहिए, तभी हम अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते है |

सबसे पहले हमें किसी भी काम में सफल होने के लिए संकल्प लेना होगा, हमें प्रण करना होगा कि बस अब बहुत हो गया …अब आलस नहीं करेंगे और आज का काम कल पर नहीं टालेंगे |

नए साल के लिए मैं यहाँ पाँच संकल्पों की चर्चा करना चाहूँगा जिसे हर हाल में  पूरा करना है | मुझे विश्वास है कि साल के अंत में अपने को एक नया इंसान के रूप में बदल चुके होंगे |

हर व्यक्ति के लिए अगल अगल प्राथमिकतायें होती है जैसे एक स्टूडेंट के लिए पढाई , सीनियर सिटीजन के लिए स्वास्थ,  बेरोजगार के लिए एक स्टार्ट अप शुरू करना इत्यादि

मैंने भी एक लिस्ट बनाकर अपनी डायरी में उन लक्ष्यों को लिख लिया है जो मुझे साल के अंत तक प्राप्त करने है |

और सबसे ज़रूरी बात कि उस पर लगातार मेहनत करनी होगी, ध्यान देकर उस पर अमल करना होगा  |

हमें रोज़ थोडा थोडा बेहतर (improvement) करते जाना होगा ,

छोटी छोटी सफलताओं का जश्न (celebration) भी मनाना होगा |

और इस तरह से हम अपने आप से यही कामना करते है कि

बस इतनी सी ख्वाहिस है तुझसे ये ज़िन्दगी  .

मेरा आने वाला कल  बीते हुए कल से बेहतर हो ..

तो आइये निम्नलिखित बातों पर गौर करें जो भविष्य के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो ….

अपने व्यक्तिगत ज़िन्दगी (personal life) को बेहतर बनाना :

सबसे  पहला संकल्प है कि हमें  अपने व्यतिगत जीवन को बेहतर बनाना है,  उसके लिए खुद को अनुशासन  में रखना  बहुत ज़रूरी है और अपने दिन को ऑर्गनाइज (organize) रखना भी ज़रूरी है | हमारे पास समय सिमित है और कीमती भी | साथ ही यह  तेजी से निकला चला जा रहा है |

यह सच है कि तारीखे तो लौट कर आती है लेकिन वह दिन लौट कर कभी नहीं आता है

इसलिए जो बीत गया उसके बारे में सोच कर, और अफ़सोस कर हम अपने आज को क्यों बर्बाद करें ?

 उसके बजाये हम संकल्प करें कि आने वाला एक एक  दिन को एन्जॉय करेंगे और  अपने  आज को बेहतर ढंग से प्रबंधन (manage)  करेंगे |

जिसमे हमारे स्वास्थ (Health )  से लेकर अपने शौक (hobby) तक को ध्यान में रख कर एक संतुलित दैनिक रूटीन हो जिसका अनुशरण (follow) करते हुए हमें ख़ुशी भी महसूस हो और बेकार के तनाव से भी बचे रहे |

पारिवारिक संबंधों  को बेहतर बनाना  :

हमारा परिवार हमारे जीवन का हिस्सा है | परिवार हमारी ज़रुरत ही नहीं बल्कि सब कुछ है | परिवार के मजबूत संबंधों पर ही हमारी सुकून की ज़िन्दगी टिकी हुई है |

हम दुनिया के लिए एक आम इंसान हो सकते है परन्तु हम अपने परिवार के लिए तो पूरी दुनिया ही है |

 इस कोरोना काल में एक बात तो अच्छी हुई कि जहाँ हम अपने परिवार के लिए समय नहीं निकल पाते थे | अब हमारे पास पारिवारिक रिश्तो को सुधारने  (improve), और मजबूत करने के लिए समय मिल रहा है | तो ऐसे समय को नए साल में सदुपयोग करना चाहिए |

 हमें उनका ख्याल रखना चाहिए जो हमारा ख्याल रखते है |

कोशिश होनी  चाहिए कि  घर में  खुशियों का माहौल हो | घर के हरेक कोने से हँसने और खिलखिलाने की आवाज़ आए | आप खुश  रहें और परिवार के अन्य सदस्यों को भी खुश रखें |

सामाजिक जीवन में सुधार करना :

हम एक समाज में रहते है | रोज़ लोगों से मिलना जुलना होता है | जहाँ हम काम करते है या  हमारे घर के आस पास के लोगों  से बेहतर सम्बन्ध बना कर रखना है | यह ज़रूरी नहीं कि हम बहुत सारे नए रिश्ते बना लें लेकिन यह बहुत ज़रूरी है कि जो पुराने रिश्ते है उनको संभाल  कर रखा जाए |

रिश्ते वो नहीं होते जो तस्वीर में साथ खड़े दिखाई देते है बल्कि रिश्ते वो होते है जो तकलीफ में साथ खड़े होते है | हमें हमेशा दूसरों की मदद करने की सोच रखना चाहिए  |

क्योंकि रिश्ते ज़िन्दगी के साथ नहीं चलते, लेकिन एक बार जब रिश्ता बन जाता है तो  ज़िन्दगी रिश्तों  के साथ चलती है | अगर कुछ छोटी मोटी रंजिश है तो तुरंत उसे ठीक कर लें | कही ऐसा ना हो कि नए रिश्ते बनाने के चक्कर में पुराने छुट जाएँ |

अपने सपनो को साकार करना

हर इंसान के ज़िन्दगी में कुछ शौक (hobby) होती है,  कुछ सपने होते है, जिसे वह पूरा करना चाहता है |

अगर सपने हमारे है तो कोशिश भी हमें ही करनी होगी |

मंजिल मिले ना मिले यह बड़ी बात नहीं है लेकिन कोशिश भी ना करे तो ये गलत बात होगी | हमें कोशिश करनी है अपने सपनो को साकार करने के लिए |

हमें अपनी  क़ाबलियत बढानी होगी, उसके लिए हमें लगातार प्रयास करनी होगी  |  समाज को दिखाना होगा कि हमने अपनी क़ाबलियत के बल पर ये मुकाम हासिल किया है |

यूँ ही नहीं होती हाथ की लकीरों  के आगे उँगलियों .

रब ने किस्मत से पहले  मेहनत जो लिखी है …

अगर किसी अच्छे काम के लिए लोगों से वाह – वाही (appreciation) नहीं मिलती है तो कोई बात नहीं ,… बस अपनी कोशिश जारी रखनी है | फल की चिंता ऊपर वाले पर छोड़ देना चाहिए |

सकारात्मक सोच रखना

ऊपर  लिखे सारी बातों का कोई मतलब नहीं अगर हम अपनी सोच सकारात्मक नहीं रखते है |

अपनी सोच ऐसी होनी चाहिए कि …मन का हो तो अच्छा और अगर मन का ना हो तो और भी अच्छा | क्योंकि ऐसी स्थिति में वही होगा जो भगवान् को मंज़ूर होगा | और हमें तो भगवान् पर पूरा भरोसा है |

अगर हमें कुछ पल के लिए सफलता नहीं मिल रही है तो हमें उदास होकर बैठ नहीं जाना है, बल्कि अपने बेस्ट (best) देने का प्रयत्न करते रहना चाहिए.| एक दिन  उसका फल मेरे मन के अनुसार अवश्य मिलेगा  |

ज़िन्दगी में तो समस्याएँ आएँगी ही,  बस हमें धर्य बनाये रखना होगा, और पूरी शक्ति से मुकाबला करना होगा |

हो सकता है कभी लोग मजाक भी उड़ायें, ताने भी कसे,  परन्तु उनकी इन बातों का अपने पर असर नहीं होना चाहिए | अपना रिमोट बटन दुसरे के हाथ में क्यों देना |

सफलता उन्हें नहीं मिलती जो पाने का प्रयास करते है बल्कि सफलता उन्हें मिलती है जो पाने तक प्रयास करते रहते है |

हमें आशा है कि आप भी नए साल के लिए कुछ सपने संजोय होंगे और उसे पाने के लिए कुछ संकल्प किया होगा | आपने resolution बनाया कि नहीं ?

हमें ज़रूर अपने विचारों से अवगत कराएँगे .. ..नया साल २०२१ आप को बहुर बहुत मुबराल्क हो …

गुज़रो न बस क़रीब से..तुम  ख़याल की तरह

अब तो मुस्कुराओ ज़िंदगी ..नए साल की तरह,

आँसू छलक पड़ें न फिर… किसी की बात पर

लग जाओ मेरी आँखों   से.. रूमाल की तरह..

बैठो भी अब ज़हन में .. मीठी याद की तरह

उठते हो बार-बार क्यों  ..सवाल की तरह..??

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

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