सकारात्मक विचार …6

लकडहारे की सोच

हमारे जीवन में सोच का बहुत महत्व होता है. जब हमारी सोच सही होती है या जब हम सकारात्मक सोचते है तब हमारे सारे काम भी सही तरीके से पूरे हो जाते है.|

 जिस व्यक्ति की सोच नकारात्मक होती है वह हर चीज में नकारात्मक बातें ढूंढने लगता है जिससे उस व्यक्ति का कोई भी  काम सही सही ढंग से नहीं  हो पाता है |

यह सोच का ही अंतर होता है जहाँ कोई विद्यार्थी कक्षा में अच्छी सोच के कारण अच्छे नंबर ले आता है तो कोई नकारात्मक सोच रखने वाला छात्र कक्षा में फेल हो जाता है |.

हमारे मन में लगातार कुछ ना कुछ विचार आते रहते है , उसमे कुछ सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक भी होते है |

अगर हमें अपने जीवन में कुछ भी कामयाबी प्राप्त करनी है तो आज से ही हमें अपनी सोच सकारात्मक रखनी होगी |.

इसी सन्दर्भ में मुझे एक कहानी याद आ गई जिसे मैंने एक बार पढ़ा था | वह कहानी मैं आप सब लोगों  के साथ शेयर करना चाहता हूँ |

एक लकडहारा था जो रोज जंगल  से लकड़ियाँ काट कर लाता  और उसे बेच कर  अपने और अपने परिवार का भरण पोषण करता था | एक दिन वह लकड़ी काटने  के लिए एक घने जंगल में बहुत अन्दर तक चला गया | 

लकड़ियाँ काटते हुए वह काफी थक चूका था,  ऊपर से गर्मी के कारण वह पसीने से लथ पथ हो रहा था |

तभी सामने एक विशालकाए वृक्ष देख कर उसके नीचे बैठ कर वह आराम करने लगा | वहाँ आराम करते हुए उसके मन में ख्याल आने लगा …यहाँ का ज़मीन  कितना सख्त है, अगर यहाँ आरामदायक बिस्तर होता हो मैं उसपर आराम कर अपनी सारी थकान मिटा लेता |

उसी समय एक चमत्कार  हुआ और तुरंत ही वह अपने को एक आरामदायक और  गद्देदार बिस्तर पर पाया |

उसे यह  देख कर  आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा | वो बिस्तर पर लेट  कर आराम करते हुए फिर सोचने लगा , काश इस जंगल में इस समय स्वादिस्ट भोजन भी मिल जाता तो उसे खाकर मैं अपनी भूख मिटा पाता |

तभी दूसरा चमत्कार  हुआ और उसने एक सुन्दर थाली में स्वादिस्ट भोजन सामने रखा हुआ पाया | वह आश्चर्य से इधर उधर देखा लेकिन उसे  वहाँ कोई भी दिखाई नहीं दिया |

वह सोचने लगा कि आज  क्या बात है कि मैं जो भी इच्छा कर रहा हूँ वो अपने आप पूरा हो  हो रहा है |

खाना खाने  के बाद उसे पानी पीने की इच्छा हुई, तभी उसके मन में विचार आया  कि काश अभी ठंडी लस्सी मिल जाती तो इस गर्मी में उससे अपनी प्यास बुझाता |

और तभी तीसरा चमत्कार हुआ और चाँदी के गिलास में स्वादिस्ट लस्सी उसके सामने रखा था | वह घोर आश्चर्य में पड़  गया | यहाँ तो कोई भी नहीं है फिर यह सब कौन दे रहा है |

इसका पता लगाने के लिए वह मन ही मन सोचने लगा और अपने मन में इच्छा किया कि कोई मेरे बदन का मसाज़ कर देता तो सारी थकान मिट जाती |

उसके मन में ऐसा ख्याल आते ही उसने महसूस किया कि कोई मुलायम  हाथ उसके बदन का मसाज़ कर रहा है, लेकिन कोई दिख नहीं रहा है |  उसे बहुत आराम महसूस होने लगा |

वह आँखे बंद किये सोच रहा था कि मैं जो भी सोच रहा हूँ वह सब सच कैसे हो जा रहा है |,

 शाम होने को आ रही थी और उसे अब डर भी सताने लगा | और डर के मारे उसके मन में ख्याल आया कि इतना घना  जंगल है कि  कही यहाँ शेर ना आ जाए |

उसके मन में ऐसा विचार आते ही एक शेर सामने प्रकट हो गया और वह लकडहारा को देख कर गुर्राया |

शेर को सामने पाते  ही वह काफी डर  गया और शेर को गुस्से में गुर्राते हुए देखा तो डर से थर थर कांपने लगा और अचानक उसके मन में ख्याल आया …अब तो मेरी ज़िन्दगी समाप्त हो जाएगी , यह शेर मुझे मार  कर खा जायेगा |

जैसे ही उसके मन में यह विचार आया , शेर उसपर झपटा और उसे मार कर  खा गया |

दरअसल, यह चमत्कार इसलिए हो रहा था क्योंकि वह लकडहारा जिस वृक्ष के नीचे बैठा था वह कल्पतरुं वृक्ष था, जिसे इच्छा पूरी करने वाला  वृक्ष माना जाता है |

कोई भी व्यक्ति इस वृक्ष के नीचे बैठ कर जो भी उसके मन में इच्छा करता है वह पूरा हो जाता है |

वह लकडहारा इस बात  से अज्ञान था कि यह “कल्पतरुं वृक्ष” है और उसके नीचे बैठ कर वह जो भी इच्छा करता था वह सब पूरा हो रहा था, | उसे तो यह सब चमत्कार लग रह था |

हमारे  संत महापुरुष ने इस घटना  का विश्लेषण करते हुआ बताया ….यह जो “कल्पतरु वृक्ष” है यह और कुछ नहीं बल्कि हमारा mind है और हम अपने दिमाग में जो भी चीज़ बार बार सोचते है वह हकीकत में होने लगता है |

आप अपने अन्दर बार बार जैसा  महसूस ( अच्छा या बुरा ) करते है वह प्रत्यक्ष रूप से होने लगता है |  आप जो भी कल्पना करते है वह हकीकत में भी हो सकता है, बशर्ते कि उस कल्पना को साकार करने के लिए सही ढंग  से प्रयास किया जाये |

आज जो बल्ब और हवाई ज़हाज़ का आविष्कार हुआ है ..उसकी पहले किसी ने कल्पना की थी और फिर प्रयास से कल्पना हकीकत में बदल गया |

इसका मतलब है हमारा mind बहुत ही पावरफुल है, जिसकी शक्ति का हमें आभास नहीं है | इसे हम जिस तरह से  handle करते है वैसी ही हमारी life हो जाती है |

अगर समय रहते अपनी नकारात्मक सोच को सकारात्मक नहीं करेंगे तब तक हम सब  परेशानी और दुखों का सामना करते रहेंगे |

आप अभ्यास के द्वारा अपनी सोच को सकारात्मक रखे और उसे अनुभव भी करें |

अगर इससे अपनी आदत में सुधार कर लेते है तो आप महसूस करेंगे कि आपका मन स्थिर रहने लगा है और आप ने अपने मन के तनाव और दुखों से छुटकारा पा लिया है |

वैसे भी सही कहा गया है कि …

मन के हारे हार है और मन के जीते जीत |

यह ज़िन्दगी बहुत कीमती है इसे अच्छी सोच से खुबसूरत बनाना चाहिए |

मंजिल उन्ही को मिलती है

जिनके सपनों में जान होती है

पंख से कुछ नहीं होता

हौसलों से उड़ान होती है

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

10 thoughts on “सकारात्मक विचार …6

  1. बहुत बहुत धन्यवाद। यह जानकर खुशी हुई कि हमारा ब्लॉग
    आपको पसंद आता है। मेरा यह प्रयास रहता है कि सकारात्मक
    विचारों को लिख कर अपने व्यग्र मन को शांत किया जा सके।

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