# मेरी पहली विदेश यात्रा #…2

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दिल्ली एअरपोर्ट पर हमारी फ्लाइट सही समय पर लैंड कर गयी / वहाँ एअरपोर्ट पर ही  हमारे ग्रुप के सभी साथी  और केयर-टेकर मिल गए | लेकिन वे सभी उदास दिख रहे थे क्योकि आज  रात  की फ्लाइट जिससे बैंकाक जाना था वह कैंसिल हो चुकी थी  |

उसकी जगह अब दूसरी फ्लाइट कल सुबह छः बजे रवाना होगी, एयरलाइन्स वालों ने ऐसा बताया था |

 लेकिन सच कहूँ तो  मुझे सुन कर बहुत ख़ुशी हो रही थी | फ्लाइट से रात में  सफ़र करने में मुझे और भी ज्यादा डर लगता था |

खैर, रात बिताने के लिए एयरलाइन्स के तरफ से होटल में ठहराने की व्यवस्था की गई थी इसलिए चाय पिने के बाद हमलोग “होटल रैडिसन” जा रहे थे |

मुझे जब पता चला कि रात की फ्लाइट कैंसिल हो गई है तो मैं मन ही मन खुश हो गया | “होटल रैडिसन” फाइव स्टार होटल था | मुझे  पहली बार फाइव स्टार होटल में रात बिताने का मौका मिल रहा था | मैं तो बहुत ही आनंद महसूस  कर रहा था |

मैं होटल पहुँच कर सबसे पहले स्नान कर फ्रेश हुआ और फिर घडी देखा तो रात के नौ बज रहे थे | मुझे डिनर के लिए नीचे होटल के रेस्टुरेंट में जाना था |

तभी मेरी नज़र मेरे रूम पार्टनर पर गई |  वह रूम में पड़े सोफे पर  बैठ कर दारु पी रहा था |  मैंने  आश्चर्य से देखते हुए पूछा …..यह दारु कहाँ से इस समय मिल गया ?

उसने बताया …सामने जो फ्रीज है , उसमे बहुत सारे खाने-पीने की चीज़ रखी है और दारु भी |

जब होटल का कमरा फ्री है तो इसका इस्तेमाल भी फ्री होगा ना | इसलिए खाना खाने से पहले थोड़ी मार लेता  हूँ |

मैं अपना सिर पकड़ लिया और उसकी ओर  घूरते हुए कहा …यह सब खाने-पीने की वस्तुओं  का अलग से पैसा चुकाना पड़ेगा | फ्रीज में रखी  चीज़ें फ्री की नहीं है |

विदेशी दारु और वह मंहगी भी थी | पैसो की बात सुन कर उसका दारु का नशा जितना तेज़ी से चढ़ा था, उतना ही तेज़ी से उतर गया |

उसे अपनी  गलती का एहसास हुआ और उसने कहा ….हमसे गलती हो गई, अब मैं आगे से इसका ध्यान रखूँगा | ….ऐसा बोल कर वह भी मेरे साथ डिनर के लिए डाइनिंग हॉल में आ गया |  

हम दोनो नीचे रेस्तरां के डाइनिंग हॉल में पहुंचे तो वहाँ खाने के इतने सारे व्यंजन देख कर मैं आश्चर्य चकित हो गया | सच, फाइव स्टार होटल की बात ही निराली है |

चूँकि  बुफे सिस्टम था इसलिए जो भी और जितना भी मन करे खाने की आज़ादी थी | ग्रुप के सभी लोग आ चुके थे, भूख भी जोर की लगी हुई थी | फिर क्या था … हम सब लोग खाने पर टूट पड़े |

वहाँ का खाना इतना स्वादिष्ट था कि मैं सामान्य से ज्यादा खा लिया |

उसके बाद मिठाइयों पर मेरी नज़र पड़ी …करीब तीस  किस्म की मिठाई सजी हुई थी | मुझे यह देख कर मिठाई भी  खाने के लिए मन ललचाने लगा और अपने favourite गुलाब -जामुन को देख कर मैं अपने को रोक नहीं सका | अपने मनपसंद मिठाई का भी लुफ्त उठाया  |

जब कोई भी चीज़ मुफ्त में मिलता है तो हम उस पर बेरहम हो जाते  है |

मेरा  भी  रात का खाना ज़रुरत से ज्यादा हो गया था | तभी मेरा रूम पार्टनर उधर से आइसक्रीम लाकर मेरे पास ही बैठ कर  खाने लगा |

मुझे भी आइसक्रीम खाने की इच्छा हुई,  लेकिन तभी मैंने अपने मन को समझा लिया कि अभी आगे भी यात्रा का मज़ा लेना है |

उसके बाद अपने रूम में आ कर बिस्तर पर मैं गिर पड़ा | वहाँ के मुलायम बिस्तर पर लेटते ही  तुरंत नींद आ गया और मैं सपनो में बैंकाक शहर की सैर करने लगा |

सुबह जब नींद खुली तो खिड़की से धुप की हलकी झलक दिखी | मैं बिस्तर पर उछल कर बैठ गया और घड़ी की तरफ नज़र किया तो पाया कि दिन के आठ बज चुके है |

मेरे मन में यह बात बिजली की तरह कौंध गई कि मेरी फ्लाइट तो अब  छुट गई | उसका प्रस्थान का समय तो सुबह छः बजे का ही था |

शायद मुझे उठाने के लिए कोई बाहर से दरवाजा खटखटाया भी होगा | लेकिन थकान के कारण नींद नहीं खुल सकी |

पास के बेड पर रूम पार्टनर तो अभी भी घोडा बेच कर सो रहा था  | मैं गुस्से में उसे झकझोड़ कर उठाया और कहा …अपनी तो बैंकाक  की फ्लाइट मिस हो गई |

मेरी बात जैसे ही उसके कानो में पड़ी , वह भी हडबडा कर उठ बैठा और कहा…. अब क्या होगा ?

तभी दरवाजे के नीचे से सरकाया गया सुबह के अखबार पर मेरी  नज़र पड़ी |

मैं अखबार जैसे ही उठाया तो उसके साथ एक सिल बंद लिफाफा भी था | मैं अखबार को बिना पढ़े एक तरफ फेंक दिया और लिफाफा को जिज्ञासा से खोलने लगा |

मेरी तो साँसे अटकी हुई थी |

लिफाफा में एक मेसेज था …आप की फ्लाइट पाँच  घंटे लेट है | अब वह ग्यारह बजे दिन में रवाना होगी |

उस मेसेज को पढ़ते ही मेरी जान में जान आ गई | अब दिल को तसल्ली हो गया कि विदेश यात्रा तो हो कर ही रहेगा |

मेरा  रूम पार्टनर और हम  जल्दी ज़ल्दी आगे की यात्रा के लिए तैयार होने लगे और सही वक़्त पर हम सभी एअरपोर्ट पर थे |

यहाँ से बैंकाक का सफ़र फ्लाइट के द्वारा चार घंटे में पूरी होनी थी |  सिक्यूरिटी चेकिंग के बाद मेरी घबड़ाहट बढ़ने लगी, खिड़की के शीशे से सामने खड़ी प्लेन दिखाई दे रही थी … थाई एयरलाइन्स |

मैं किसी तरह अपने मन को समझाया कि इतने लोग हमारे साथ ग्रुप में इस फ्लाइट से सफ़र कर रहे है तो डर किस बात की |  हमें तो एन्जॉय करना चाहिए |

दुर्भाग्यवश हमें विंडो सीट मिला था, जिससे बाहर के प्राकृतिक सुन्दरता का मजा लेने का मन ही मन फैसला कर लिया | अगर विंडो सीट किसी से एक्सचेंज करता तो मेरी कमजोरी सभी को पता चल जाता और शायद मैं मजाक का पात्र  बन जाता |

थोड़ी ही देर में फ्लाइट टेक ऑफ हो रही थी , तो उस समय  थोड़ी घबराहट का अनुभव होने लगा फिर मैं हिम्मत कर के प्लेन की खिड़की से बाहर का ख़ूबसूरत नज़ारा देखने लगा और तभी मन में हो रही घबराहट शांत हो गई |

खिड़की के बाहर रुई जैसी सफ़ेद चादर की तरह फैली बादलों को देख कर मैं रोमांचित होने  लगा और फिर अपने  मोबाइल से उस मनोरम दृश्य को कैद करने लगा |

चार घंटे की हवाई यात्रा पूरी होने के बाद हम सब  बैंकाक एअरपोर्ट पर लैंड कर चुके थे |

हमलोग बैंकाक एअरपोर्ट पर वीसा की फॉर्मेलिटी पूरी कर गेट नम्बर 8  से बाहर आ गए | वहाँ एक टूरिस्ट बस और गाइड तो  पहले से बुक किया हुआ था |

हमलोगों के पहुँचते ही वहाँ से पटाया के लिए तुरंत ही उसी बस से रवाना हो गए | करीब  तीन घंटे की यात्रा के बाद हम सब पटाया पहुँच गए | वहाँ एक होटल में चेक  इन करने हेतु  उसके काउंटर पर जमा हुए | काउंटर पर फॉर्मेलिटी करने के बाद रूम की  चाभियाँ हमलोगों को दी गई |

लेकिन इस बार रूम पार्टनर बदल गया था | होटल वालों  ने ही पहले से दो – दो व्यक्ति को एक कमरा  अलाट कर रखा था और उसी के हिसाब से सबों का नाम रजिस्टर में अंकित कर दिया |

घडी देखा तो रात के दस बज चुके थे |

मुझे थकान का अनुभव होने लगा और भूख भी लग रही थी | होटल तो शानदार था,  कमरे में सामान रख कर तुरंत ही हमलोग डिनर के लिए उसी के रेस्टोरेंट में एकत्र हुए | खाना खाते समय ही नींद  जोरो की आ रही थी |

बस फटाफट खाना खा कर अपने कमरे में आया और सीधा बिस्तर में घुस गया | आँख बंद करते ही नींद की आगोश में चला गया | लेकिन थोड़ी देर के बाद ही मेरी नींद  खुल गई |

कमरे में मेरे पार्टनर की नाक जोर जोर से बजने की आवाज़ आ रही थी. |  इतना ज्यादा आवाज़ कर रहा था कि कोशिश करने पर भी नींद नहीं आ रही थी |

मैं करवट बदलने लगा और अपने पुराने रूम पार्टनर को याद करने लगा |

मैं एक दो बार उसे हिलाया डुलाया भी  ताकि उसकी नाक की आवाज़ बंद हो जाये | लेकिन थोड़ी देर खामोश  रहने के बाद वह फिर से  शुरू हो जाता |

इसी तरह कबड्डी खेलते हुए मेरी पूरी  रात बीती | इतना सुन्दर होटल और आराम दायक बिस्तर होने के बाबजूद रात भर बस करवटे  बदलता रहा | इस तरह का यह  मेरा पहला कटु अनुभव था |

एक बार तो गुस्से में मैंने  उसे लात भी मारी फिर भी वो नींद से जगा नहीं | वो तो एकदम घोड़े बेच कर सुख की नींद सो रहा था …(क्रमशः)

इसके आगे की घटना जानने हेतु नीचे link पर click करे..

# मेरी पहली विदेश यात्रा #…3

BE HAPPY….BE ACTIVE….BE FOCUSED….BE ALIVE…

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Categories: Tour & Travel

10 replies

  1. Abhi bhi story baki hai.
    Nice.

    Liked by 1 person

  2. Gd morning have a nice day sir ji

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  3. Thank you dear. Stay connected and stay blessed

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  4. Quite an adventure — both on and off the plane! 🙂

    Liked by 1 person

  5. hahahah…Thank you sir..
    really , I have foiba for that ..
    I am happy to know that you enjoyed the reading about my adventurous journey..
    Thank you sir..

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  6. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Making a friend is an act of Grace,
    Having a friend is a Gift…Keeping
    a friend is a virtue.. Being a friend is an Honour..

    Liked by 1 person

  7. बहुत बढ़िया वर्णन
    पर सर जी आपने यह नही बताया शराब के कितने दाम चुकाए आपने।।

    Liked by 1 person

  8. हहहाह्हा …आप चारो भाग पढ़े ,तो शायद
    आपके प्रश्न का उत्तर मिल जाए |
    वैसे ,मेरे ब्लॉग को पढने के लिए बहुत आभार |

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