मेरी पहली विदेश यात्रा …1

हेल्लो दोस्तों,

मैं इस ब्लॉग के माध्यम से अपनी बहुत सारी रचनाये पोस्ट करते रहता हूँ, जिनमे से  कुछ रचनाये काफी बड़ी होती है | अतः आप सबों की सुविधा के लिए उसे धारावाहिक के रूप में प्रस्तुत करता हूँ |

आज भी मैं  अपने इस ब्लॉग में अपना संस्मरण जिसका शीषक मैंने “मेरी पहली विदेश यात्रा” रखा है, वह आप सबों के बीच  प्रस्तुत करने जा रहा हूँ |

यह संस्मरण मेरे विदेश यात्रा के अनुभव की प्रस्तुति है और यह भी लम्बा होने वाला है | अतः इसे किस्तों में लिखने का फैसला किया है ताकि आप इसका अच्छी तरह से आनंद ले सके और आप की दिलचस्पी भी इसमें बनी रहे |

आप सब  मेरे हर ब्लॉग को धैर्य पूर्वक पढ़ते है और पसंद भी करते है | इसके लिए आप सबो का तहे दिल से शुक्रिया |

कभी कभी इंसान जब अपने ज़िदगी के बिताये हुए लम्हों को याद करता है तो कुछ पल ऐसे भी होते है जिसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करने का मन करता है  |

वैसे तो ना जाने कितनी ही बार हवाई सफ़र किया हूँ लेकिन यह सच है कि मैं आज भी प्लेन से सफ़र करने से डरता हूँ और जब तक प्लेन हवा में रहता है तब तक बेचैनी महसूस करता हूँ |

तब और भी डर  महसूस होने लगता है जय एयर होस्टेस का उद्घोषणा सुनाई पड़ती है . कि बाहर मौसम ख़राब है, कृपया अपनी सीट-बेल्ट बाँध ले |

हाँ,  मुझे रेल से सफ़र करने में मजा आता है क्योंकि सफ़र के दौरान नए नए लोगों से मिलने और दोस्ती करने के पर्याप्त अवसर  मिलते है | लेकिन प्लेन में तो एक बार टेक ऑफ  किया फिर एक या दो घंटे में ही लैंडिंग हो जाता है | और तो और जितनी देर प्लेन हवा में रहती है , मेरी तो साँसे भी अटकी रहती है |

बस मन चाहता है कि जल्दी से प्लेन लैंड कर जाये  और मैं यहाँ से निकल भागूं |

मैंने तो “हवाई जहाज़ की पहली यात्रा” शीर्षक पर भी एक ब्लॉग बनाया था जिसमे पहली बार प्लेन में चढ़ने का अनुभव शेयर किया था | आप उसे एक बार ज़रूर पढ़े , link नीचे दिया हुआ है |

https:||wp.me|pbyD2R-R

एक दिन की बात है कि मैं बैंक में अपने चैम्बर में बैठा एक ग्राहक से बात कर रहा था तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी | मैंने देखा तो हेड ऑफिस का नंबर था | जल्दी से मैंने फ़ोन उठाया और कहा …हेल्लो, मैं वर्मा बोल रहा हूँ |

मुझे पता है , आप बोल रहे है | लेकिन  वर्मा जी आप ने मुझे पहचाना ?….उधर से आवाज़ आ रही थी |

मुझे आवाज़ तो जाना पहचाना लग रहा था लेकिन  कन्फर्म नहीं कह सकता था कि  बोलने वाला  कौन है |

मैं अनुमान लगा ही रहा था कि उसने  ही अपना परिचय देते हुए कहा ….मैं प्रदीप शर्मा बोल रहा हूँ … अब, आपने मुझे पहचाना वर्मा जी ?

उसका नाम सुनते ही मैं  ख़ुशी से उछल पड़ा | आज 15 सालों के बाद उससे बात हो रही थी | हमलोग राजस्थान में पास पास के शाखा में थे और तीन सालों तक हमलोग हर रविवार  को या अन्य छुट्टी के दिन  साथ साथ बिताते थे | कभी पार्टी करते तो कभी कही घुमने का प्रोग्राम होता था |

हम दोनो उन दिनों अकेला ही बिना परिवार के रहते थे | हमलोग ने  साथ साथ राजस्थान के बहुत जगहों का भ्रमण किया था |

अचानक बिताये गए उन दिनों को याद करके बहुत अच्छा लग रहा था | उन दिनों बैंक के कामों में उतनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता था | क्योंकि उन दिनों राजस्थान की ग्रामीण शाखाओं में काम करके बहुत मज़ा आता था | वहाँ के लोग बहुत अच्छे, ईमानदार और मेहनती थे |

मैं ख्यालों में खो गया था तभी उसकी आवाज़ फिर एक बार सुन कर ध्यान भंग हुआ और मैंने पूछा …कैसे हो शर्मा जी ?

मैं तो ठीक हूँ , और आपको एक खुशखबरी देने के लिए फ़ोन किया है …उसने खुश होते हुए कहा |

कौन सी खुश खबरी ?….मैंने आश्चर्य प्रकट करते हुए पूछा |

आप को विदेश यात्रा के लिए सेलेक्ट किया गया है और आपको अगले माह थाईलैंड जाना है | आप का प्लेन टिकट बैंकाक के लिए भेज रहा हूँ | आप अन्य आवश्यक कार्यवाही ज़ल्दी से ज़ल्दी कर लीजिये |

मैं विदेश यात्रा का जिक्र सुनते ही अपने कुर्सी पर उछल पड़ा, क्योकि यह मेरे जीवन की पहली विदेश यात्रा होने वाली थी | शाखा के इन्सुरेंस बिज़नेस के टारगेट हासिल करने पर मुझे सेलेक्ट किया गया था |

जीवन में कुछ भी पहली  बार होता है तो उसमे उत्साह बहुत ही ज्यादा होता है |

मैं भी ख़ुशी से थ्रिल हो रहा था | लेकिन अचानक दुसरे पल ही मेरा थ्रिल गायब  हो गया और  मेरा  दिल डर  के मारे धक् धक् करने लगा |

इसका मुख्य कारण था कि मुझे विदेश भ्रमण के लिए  प्लेन से यात्रा करना पड़ेगा और वो भी लगातार छः घंटे की यात्रा होगी |

मेरी तो एक या दो घंटे की यात्रा में ही पसीने छूटने लगते है और यहाँ तो छः घंटे लगातार आकाश में रहना पड़ेगा | मैं सोच सोच कर परेशान हो रहा था तभी फिर शर्मा  जी बोल पड़े …क्यों वर्मा जी, सुन कर आप को ख़ुशी नहीं हुई ?

नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है , शर्मा जी  | मैं उसे कैसे समझाऊँ कि  मेरे मन में इस वक़्त क्या चल रहा है |

खैर मैं बातों का सिलसिला बढ़ाते हुए पूछा …कितने दिनों का टूर है ?

आपलोग चार दिनों के लिए थाईलैंड जा रहे है और 24 लोगों का ग्रुप है | मैं पूरी जानकारी मेल द्वारा भेज दिया हूँ |

लेकिन आप की बातों से ऐसा लगा कि आपको  इस विदेश यात्रा की बात सुन कर प्रसन्नता नहीं हुई |

मुझे लाचार हो कर  अपनी कमजोरी के बारे में उसे बताना ही पड़ा |

मेरे सामने बैठे मेरे ग्राहक भी मेरी  वार्तालाप सुन रहे थे और उन्हें भीं मेरी कमजोरी का पता चल गया |  मुझे देख कर वो मुस्कुराने लगे |

खैर, अगर प्लेन वाली बात को छोड़ दिया जाए तो थाईलैंड और उसके आस पास घुमने के लिए चार दिनों का टूर पैकेज थे, जिसको सोच कर मैं आनंदित था |

जब यह बात अपने घर में बताया तो सबसे ज्यादा ख़ुशी मेरे छोटे बेटे को हुई थी |

उसी ने मेरे थाईलैंड  जाने की तैयारी शुरू कर दी | नए नए कपडे ख़रीदा गया, जूते भी ख़रीदे गए यहाँ तक कि travelling बैग भी नया ख़रीदा गया |

विदेश में अपने देश की इज्जत ना ख़राब हो इसका पूरा ध्यान रखा गया था | वीसा और पासपोर्ट वगैरह तो बैंक के तरफ से ही इंतज़ाम किया गया था |

और देखते ही देखते विदेश यात्रा का समय आ गया और मैं पूरी तैयारी के साथ पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गया |

क्योकि वहाँ से ही सब लोगों को साथ साथ थाईलैंड के लिए रवाना होना था |

मैं ग्रुप लिस्ट को जब देखा तो सारे ग्रुप के लोग राजस्थान से थे | मैं ही अकेला दुसरे स्टेट से था और उनमे कोई  पूर्व परिचित भी  नहीं था | मैं मन ही मन सोच रहा था कि कोई परिचित साथ होता तो यात्रा और भी मजेदार होता |

खैर मुझे याद है वह दिन , सोमवार 24 जुलाई , जिस दिन पटना से अपनी यात्रा शुरू की थी |

मैं पटना से  दिल्ली जाने के लिए जय प्रकाश नारायण एअरपोर्ट पहुँचा | साथ में छोड़ने के लिए घर के सदस्य भी आ गए थे | सभी लोग खुश दिखाई पड़ रहे थे, जबकि मेरे चेहरे पर तनाव साफ़ झलक रहा था | यह तो होना ही था क्योकि प्लेन में चढ़ने से पहले मेरा यही हाल हो जाता था  |

अगर कोई बाहरी आदमी उस समय देखता तो उसे महसूस होता कि  मुझे छोड़ कर बाकी सभी लोग सफ़र में जा रहे है | क्योकि मेरे चेहरे पर ख़ुशी की जगह उदासी साफ़ झलक रही थी  |

खैर किसी तरह दिल्ली पहुँच गया और वही एअरपोर्ट पर केयर टेकर और सभी साथी मिल गए | आपस में परिचय हुआ और फिर हमलोग चाय पिने के लिए पास के  रेस्तरां में बैठ गए |

एअरपोर्ट पर ही पता चला कि अभी जो शाम की हमारी फ्लाइट थी वह टेक्निकल कारणों से कैंसिल कर दिया गया है और उसकी जगह अब दूसरी फ्लाइट कल सुबह छः बजे रवाना होगी, एयरलाइन्स वालों ने ऐसा बताया था |

चूँकि बैंकाक  की फ्लाइट कल सुबह जाना था,  इसलिए आज रात होटल में ठहराने की इंतज़ाम की गयी थी |

ग्रुप के सभी लोग फ्लाइट के कैंसिल की खबर सुन कर दुखी हो गए , लेकिन मुझे तो सुन कर बहुत ख़ुशी हो रही थी | रात की फ्लाइट के सफ़र में तो मुझे और भी ज्यादा डर लगता था |

एअरपोर्ट से ही हमलोगों को एक बस के द्वारा “होटल रैडिसन” पहुँचाया गया, जो एअरपोर्ट से कुछ ही दूर पर थी……(क्रमशः )..

इससे आगे की ब्लॉग  हेतु नीचे link पर click करे..

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

8 thoughts on “मेरी पहली विदेश यात्रा …1

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