हर ब्लॉग कुछ कहता है ..10

सच्ची दोस्ती

एक प्राइवेट स्कूल,  जिसमे छोटे छोटे बच्चे एडमिशन लेते है | सभी एक दुसरे से अनजान | लेकिन कुछ दिन बीतने के बाद एक ही क्लास के छह बच्चो की आपस में गाढ़ी दोस्ती हो जाती है | वे सब स्कूल में टिफ़िन करते तो साथ साथ, खेलते तो साथ साथ |

समय बीतते गए और देखते ही देखते सारे बच्चे उसी स्कूल में मेट्रिक क्लास  तक पहुँच चुके थे, लेकिन आपस की दोस्ती और भी  पक्की हो गई |

इनमे कमाल  का आपस में स्नेह और प्यार था | ये छह दोस्तों की आपस में दोस्ती ऐसी कि हर कोई दोस्ती की जब मिशाल देता तो इन लोगों की देता |

अब इन सारे विद्यार्थियों के लिए यह स्कूल का अंतिम साल था ..साथ ही वे उस स्कूल के सबसे पुराने और सीनियर विद्यार्थी  बन गए. |

यहाँ से निकलने के बाद सभी को एक कॉलेज के नए माहौल में जाना था |

इनमे से भी तीन दोस्त ऐसे थे तो  खासम – खास थे  और  एक दुसरे का बहुत ख्याल रखते थे  | उनके  नाम थे …नेहा , कुमार  और तुषार |

हालाँकि नेहा की  बहुत दिनों से कोशिश थी कि कुमार को अपने प्रेम के माया जाल में फंसा  ले | क्योकि कुमार बहुत ही सीधा  साधा और  अपने दोस्तों में सबसे स्मार्ट और तेज़ विद्यार्थी  था |

वही दूसरी ओर नेहा तीन बहनों में से एक थी  और घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी ,लेकिन उसके शौक -मौज किसी राजकुमारी से कम नहीं थे |

कुमार ने जब नेहा के प्यार का कोई खास अहमियत नहीं दे रहा था तो नेहा ने उसे जीवन साथी बनाने की मन ही मन ठान लिया |

नेहा अपने मन की बात उसे कह नहीं पा रही थी कि कहीं आपस  की दोस्ती ना ख़तम हो जाये |

तब नेहा ने अपनी प्यार वाली बात तुषार को बतला दी और कहा …मैं उससे प्यार करने लगी हूँ | तुषार को  इस  बात का जब पता चला तो  उसने अपने दोस्त होने का फ़र्ज़ अदा किया | उसने आगे आकर पहल किया और दोनों को आमने सामने लाकर आपस से बात करवा दी | उस दिन से दोनों की   फ्रेंडशिप अब रिलेशनशिप में बदल गयी |

अब दोनों खुल कर अपने प्यार का इज़हार करने लगे  और लव स्टोरी शुरू हो चुकी थी |

दोनों आपस में बहुत तरह के फेस्टिवल celeberate करते रहे कभी चोकलेट day तो कभी , फ्रेंडशिप day, और हर बार नेहा की ख्वाहिस होती कि कुमार उसे मंहगी – मंहगी गिफ्ट देता रहे | कुछ दिनों तक तो  कुमार उसकी इच्छा पूरी करता रहा और यह ध्यान रखता कि उसके  लव स्टोरी में कही ब्रेक नहीं आये |

लेकिन कुछ दिन बीते थे कि कुमार  को यह एहसास हुआ कि नेहा बहुत ही demanding होते जा रही है | उसे हर समय,  हर occassion  पर कोई ना कोई गिफ्ट चाहिए जबकि कुमार  एक साधारण परिवार से ताल्लुख रखता था और उसके पास इतने पैसे नहीं होते थे कि उसकी कीमती डिमांड पूरी कर सके |

नेहा को यह समझ नहीं होता कि गिफ्ट तो एक सरप्राइज होता है  जो ख़ास मौको पर ही दिया जाता है और वह समय यादगार पल बन जाते है |  कुमार ने नेहा को यह बात समझाने की कोशिश भी की लेकिन सफल नहीं हो सका |

तभी प्रेमी- प्रेमिका का एक महान पर्व ..14 फरवरी , यानी वैलेंटाइन day आने वाला था |

नेहा हमेशा की तरह कुमार  से बोली … कितना exiting  day आने वाला है | इसे हम शानदार ढंग से मनाएंगे, पार्टी करेंगे, डिनर डेट पर चलेंगे  और तुम मुझे एक अच्छा सा उपहार देना जो यादगार बन जाये |

 जब वो बोल रही थी तो उसके चेहरे पर बहुत  उत्साह थी और कुमार  से बहुत सारी उम्मीदें लगा रखी  थी |

इन सब के लिए तो बहुत पैसो की ज़रुरत होगी और कुमार के पास इतने तो पैसे थे नहीं  |  इसलिए उसने  बहाना बनाया कि उस समय मैं यहाँ नहीं रहूँगा,  मुझे अपने  एक रिश्तेदार के यहाँ समारोह में जाना है |

लेकिन उसके बात करने के तरीके से नेहा समझ गई कि कुमार  झूठ बोल रहा है |

नेहा नाराज़ होते हुए बोली…मैं जानती हूँ कि तुम झूठ बोल रहे हो |, तुम्हे मेरे साथ कोई भी पार्टी करने की इच्छा नहीं होती है | वह काफी नाराज़ हो गयी और वहाँ से उठ कर चली गई |

ऐसा लगा कि वैलेंटाइन day आने से पहले ही इन दोनों का break up हो गया हो  |

कुमार  को समझ में नहीं आया कि इस मामला को कैसे सुलझाये इसलिए इस समस्या को लेकर वह अपने मित्र तुषार के पास आया  |

कुमार ने   सारी बात उसे बताई और कहा ….नेहा तो नाराज़ हो गई है | उसे तो बहुत  सारे गिफ्ट चाहिए और पार्टी होना चाहिए जो मैं afford नहीं कर सकता हूँ | मैं घर से इन सब बातों के लिए पैसे नहीं मांग सकता |

तुषार उसकी बातों को सुनकर कहा.. दोस्त, तुम फिक्र मत करो, सब कुछ ठीक हो जायेगा |

14 फरबरी का दिन भी  आया और शाम के समय कुमार के पास तुषार का फ़ोन आता है  |.. तुषार ने कहा …भाई, तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है, तुम्हे हिन्द होटल में आना है |

कुमार  उस होटल  में जाता है और देखता है कि एक शानदार सी पार्टी का आयोजन की गई है |

वहाँ स्पेशल arrangement नेहा और कुमार  के लिए किये गए थे |

कुमार  यह सब देख कर चौक जाता है | बहुत सारे गिफ्ट एक तरफ रखे हुए थे | नेहा वहाँ पहले से ही पहुँच गई थी .और .जैसे ही वह  कुमार  को  देखी  तो दौड़ कर उसके गले लग गई और कहा ….मुझे मालून था कि तुम मुझे valantine day पर सरप्राइज दोगे |

तुमने आज मुझे best surprise दिया है सचमुच तुम मेरे best फ्रेंड हो, best love  हो |

कुमार  तो जबाब में कुछ नहीं बोला लेकिन उसे समझ में आ गया कि तुषार ने इस पार्टी का arrangement अपने पैसो से किया है. मेरे लिए और  नेहा को बताया कि यह मेरे तरफ से है |

पार्टी जब अपने चरम सीमा पर थी और सभी लोग इसका भरपूर आनंद उठा रहे थे | उसी समय वहाँ बने छोटे से स्टेज से तुषार annouce करता है कि आज की पार्टी कुमार ने नेहा के लिए ……

उसकी बात पूरी होने से पहले ही कुमार दौड़ कर तुषार के पास पहुँच जाता है और उससे माइक लेकर अपने दोस्तों से कहा … …दोस्तों, सच तो यह है कि यह पार्टी का सारा arrangement मेरे और नेहा के लिए तुषार ने अपने पैसो से किया है और वह इसलिए कि नेहा और मेरे बीच के रिलेशनशिप को बचाया जा सके |

कुमार के मुँह से सच्चाई सुन कर सभी  दोस्तों को आश्चर्य होता है और तुषार के सम्मान में सभी लोग तालियाँ बजा कर स्वागत करते है , परन्तु पास खड़े नेहा को अपनी गलती का एहसास हो रहा था |

कुमार ने नेहा की तरफ देखते हुए कहा …. तुम्हारे और हमारे विचार अलग अलग है,  शौक  भी अलग अलग अलग  है ..| तुम जो कुछ भी चाहती हो, मैं उसे पूरा नहीं कर सकता हूँ | इसलिए यह अच्छा होगा हमलोग  अपने अपने रास्ते अलग कर लें. | और उसी वक़्त कुमार ने ने नेहा से अपना break up कर लिया |

फिर पास खड़े तुषार को गले लगा लिया और कहा …भाई, तुम हो मेरे सच्चे दोस्त. .|

तुमने आज मुझे सिखाया कि लाइफ में रिलेशनशिप से बड़ी चीज़ होती है फ्रेंडशिप |

यह हमारी  दोस्ती ही है कि तुमने मेरे नाम पर इतना सारा पैसा खर्च कर दिया ताकि मेरे रिलेशनशिप को बचाया जा सके |

i love you मेरे भाई | इस पर तुषार ने कहा ..दोस्त चिंता मत करना  ,रिलेशनशिप ना सही फ्रेंडशिप तो रहेगी ही…

यह छोटी सी कहानी हमें सिखाती है कि अगर सच्चा दोस्त जब आप के साथ है तो सब कुछ आप के पास  है |

सच्चे दोस्त की मिशाल बनिए और सच्चे दोस्त की क़द्र कीजिये,…. हाँ या ना |

    हर ख़ुशी दिल के करीब नहीं होती

मोहब्बत ग़मों में शरीक नहीं होती

ए मेरे दोस्त मेरी दोस्ती को सलामत रखना

क्योकि हर किसी को दोस्ती  नसीब नहीं होती

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