# तुम्हारा इंतज़ार है # …4

चाँद सितारों से तेरी ही बात करते हैं,
तनहाईयों में तुझे ही याद करते हैं,
तुम आओ या ना आओ मर्ज़ी तुम्हारी,
हम तो हर पल तुम्हारा इंतजार करते हैं। 

 शादी की तैयारी काफी जोरों से चल रही थी | आज  सुबह सुबह  अनामिका की माँ का फ़ोन आया |

माँ ने बताया कि शादी में शामिल होने के लिए वो पिता जी के साथ आज ही पटना मामा जी के घर  पहुँच रही है |  जब परिवार में शादी ब्याह का मौका होता है तो बहुत सारे रस्म –ओ –रिवाज़ निभाने पड़ते है  और कुछ रिवाज़ तो ऐसे होते है जिसमे ख़ास रिश्तेदार की अहम भूमिका होती है |

और फिर शादी तो लेने – देने और ख़ुशी मनाने का मौका होता है जिसमे अपने सामर्थ  के हिसाब से परिवार  वाले सहयोग करते है |

हमारे गाँव – घर में बेटी की शादी को एक यज्ञ के रूप में देखा जाता है जिसमे सभी लोग यथा – संभव अपना योगदान देकर पुण्य के भागी बनने का प्रयास करते है |

माँ से खबर पाकर अनामिका का मन ख़ुशी से झूम उठा | वह भी होस्टल से मामा के यहाँ जाने का निश्चय  कर ली ताकि माँ से भेट कर सके | माँ से अलग रह कर अनामिका को हमेशा माँ की चिंता लगी रहती है |

वैसे आज सोमवार का दिन था और लंच तक क्लास होना था | इसलिए उसके बाद ही जाना संभव हो सकेगा,  ऐसा सोच कर अनामिका सुबह सबसे पहले अपने कुछ कपडे  एक बैग में डाल ली  और साथ ही रश्मि के लिए जो एक गिफ्ट खरीद कर रखी  थी उसे भी अपने कपड़ो के साथ पैक कर ली | ताकि क्लास समाप्त होते ही तुरंत मामा के घर जाने को रवाना हो सके |

अनामिका कॉलेज चली गई और फिर पूर्व निर्धारित समय के अनुसार ठीक दो बजे कॉलेज की क्लास समाप्त होने पर अपने मामा के घर के लिए रवाना  हो गई |

अनामिका जैसे ही अपने मामा के घर में घुसी तो देखा…सामने आँगन में  कुछ औरतें बैठ कर शादी के गीत गा रही थी | माँ भी उनमे शामिल होकर साथ दे रही थी |

कुछ लड़कियां तो गीत की लय पर नाच रही थी,  आपस में हँसी – ठिठोली कर रही थी और एक दुसरे को छेड़ भी रही थी  |  पूरा माहौल मस्ती वाला था और  सभी औरतें इसका भरपूर मजे ले रही थी | यह सब देख कर अनामिका के चेहरे पर भी मुस्कान बिखर गई |

शादी ब्याह का माहौल ही ऐसा होता है कि सभी लोग अपनी अपनी परेशानियों को भूल कर सब के साथ ख़ुशी मनाते है और समय समय पर शादी के अवसर पर होने वाले विधि और रस्म पुरे उत्साह के साथ करते है | इसी तरह यह सिलसिला बारात के विदा होने तक चलता रहता है |

पिता जी ड्राइंग रूम में बैठ कर मामा जी से बातें कर रहे थे | पिता जी शायद कह रहे थे कि अगर अनामिका की मेडिकल की पढाई नहीं होती तो इसका ब्याह हम पहले ही कर चुके होते |

 जैसे ही अनामिका अपने पिता के सामने पहुँची , वे लोग चुप हो गए और अनामिका की ओर देखने लगे |

तभी अनामिका ने पिता और मामा जी के पैर छुए और पिता जी से पूछा …..आप कैसे है ?

मैं तो बिलकुल ठीक हूँ बेटी | लेकिन तुम्हारी माँ को यहाँ छोड़ कर आज ही लौट जाउँगा | अभी खेती – बारी का समय है इसलिए फिर बाद में आऊंगा …पिता जी ने ज़बाब दिया |

आज तो रुक जाइए… भले ही  कल चले जाइएगा | माँ तो कह रही थी कि आज रात में कोई ऐसा रस्म होना है , जिसके लिए माँ के साथ आप को भी रहना ज़रूरी …..अनामिका ने पिता जी को माँ द्वारा कही हुई बात को बता दी |

फिर तो पिता जी को अपनी सहमती देना ही था | पिता जी ने फिर पूछा …तुम्हारी पढाई कैसी चल रही है ?

बिलकुल ठीक पिता जी …अनामिका ने कहा |

पिता जी से बातें करने के बाद  अनामिका घर के भीतर गई तो देखा  कि रश्मि को हल्दी लगाने का रस्म चल रहा था और वह हल्दी से सराबोर थी | कुछ लोग जो रश्मि को हल्दी लगा रहे थे, वो आपस में एक दुसरे को भी  हल्दी लगा कर ठिठोली कर रहे थे |

उसी समय अनामिका रश्मि के पास जाकर शादी की बधाई देते हुए बोली….देख रश्मि,  तेरे लिए मैं क्या लाई हूँ | यह कहते हुए गिफ्ट उसकी  ओर बढाई  |

रश्मि अपने हल्दी से लथपथ हाथों को दिखाते  हुए बोली….अभी मेरे  हाथ गंदे है,  इसलिए तुम  ऐसा करो कि इसे मेरे अलमारी में रख दो ,मैं इधर से फ्री होकर तुम्हारे स्पेशल गिफ्ट को  देखूँगी |

ठीक है .., अनामिका ने कहा और कमरे में आकर अपने साथ लाए हुए गिफ्ट को उसके अलमारी में रखने लगी |

चूँकि गिफ्ट कीमती थी इसलिए अलमीरा के लॉकर में  रखना उचित होगा | ऐसा सोच कर अनामिका ने चाभी लगा कर लॉकर खोला, तभी उसमे से रश्मि की  पर्सनल डायरी सरक कर नीचे  गिर गई |

अनामिका ने वापस रखने के लिए वह डायरी उठाई तभी हवा से उसके कुछ पन्ने खुल गए और अनामिका ने सरसरी निगाह उस पर डाली तो देखा कि इसमें उसके और राजीव के बारे में कुछ बातें लिखी हुई है | उसकी उत्सुकता बढ़ गई | उसके मन में आया कि उसे भी पता हो कि रश्मि  उसके और मेरे बारे में क्या लिखी है |

अनामिका ने डायरी को छुप कर पढने का निर्णय किया और इसलिए डायरी को अपने पास  छुपा कर रख ली | अलमीरा को पहले की तरह बंद कर दिया और फिर वह कमरे से  बाहर  आ गई |

अनामिका एकांत जगह की तलाश  में अपनी नज़रे इधर उधर घुमाई | लेकिन ऐसे माहौल में कोई   शांत जगह नज़र नहीं आया तो धीरे से वह छत पर चली गई |

जब  डायरी पढना शुरू किया तो उसकी नज़रे फटी की फटी रह गई …उसे तो विश्वास नहीं हो रहा था कि वह रश्मि जिसे  वो  अपनी  छोटी बहन ही नहीं बल्कि अपनी राजदार समझती थी और अपने दिल की हर बात बताती थी वह उसके साथ इतना बड़ा धोखा कर सकती है |

उसे यह सोच कर और भी दुःख हुआ कि यह जानते हुए भी कि मैं राजीव से प्रेम करती हूँ और उसे हर हाल में पाना चाहती हूँ….वह खुद राजीव से मन ही मन प्यार करने लगी |

और तो और हमारे और राजीव के बीच  में गलफहमी और कटुता को बढाने  के लिए षड़यंत्र के तहत बहुत सारी झूठी बातें फैलाई ताकि हम दोनों के बीच में दुरी बढ़े और एक दुसरे से नफरत करने लगे |

उसी का यह परिणाम रहा कि आज तक मैं राजीव को गलत समझती रही,  जब कि डायरी पढने से यह राज़  उजागर हुआ कि उसने रश्मि के माध्यम से मेरी सफलता पर बधाई भी दी थी लेकिन रश्मि ने इस बात को भी छुपा लिया ..और मैं समझती रही कि जलन के कारण उसने मुझे बधाई नहीं दी  |

डायरी पढने से यह बात भी  साफ़ हो गया था कि राजीव तो उससे बहुत प्यार करता है |

….. लेकिन वह जानता था कि अगर बात शादी पर आयी तो उसके माँ बाप इसके लिए हरगिज़ राज़ी नहीं होंगे | एक तो जाति का बंधन और दुसरे, वो ठहरे गाँव के इज्जतदार और प्रतिष्ठित लोग….

वे कभी भी अपनी एकलौती बेटी के लिए यह  रिश्ता पसंद नहीं करेंगे ….तब ऐसी परिस्थिति में एक ही रास्ता बचता था और वो था … घर वालों के विरुद्ध शादी करना और घर परिवार और समाज से कट जाना |

और तब ऐसी परिस्थिति में ना सिर्फ उसका बल्कि अनामिका की भी  ज़िन्दगी कठिनाइयों और दुखो से भर जाता |

राजीव नहीं चाहता था कि अपने क्षणिक प्यार और स्वार्थ के लिए अनामिका के ज़िन्दगी को नरक बना दिया जाए ..और उसे ज़िन्दगी भर रोने के लिए मजबूर कर दिया जाए |

इन्ही सब भविष्य की बातों को सोच  कर राजीव इस  निष्कर्ष पर  पहुँचा कि अगर अनामिका पढ़ लिख कर अपने पैरो पर खड़ा हो जाए औए ऊँचे पद पर पहुँच जाए तो ऐसी स्थिति में घर परिवार और  समाज …शायद उसके निर्णय को स्वीकार कर लेंगे |

अतः यही सोच कर शुरू में उसने अनामिका के स्वाभिमान को जगाया था और उसके अनुमान के अनुसार ही अनामिका दिल पर चोट खाकर अपने दृढ इरादों से नई  उचाईयों को हासिल  करने में लग गई |

रश्मि के डायरी में वह लेटर भी मिला जिसमे मेडिकल में दाखिला के लिए बधाई दिया हुआ था | वह लेटर भी रश्मि ने छुपा ली और मुझे नहीं दी | ऐसे बहुत सारी बातों  का खुलासा इस डायरी से हो रहा था |

यह सब देख कर अनामिका को अपनी बहन पर बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन ऐसे शादी वाले माहौल में कुछ अपशब्द बोलना उचित नहीं था और बीती बातों को कुरेदने से कोई फायदा भी नहीं होने वाला था |

लेकिन इसका मतलब साफ़ है कि राजीव बेहद  संवेदनशील इंसान है और वह अब भी मुझे उतना ही प्यार करता है | ऐसा सोच कर अनामिका के मन में जो नफरत राजीव के विरूद्ध पनप रही थी उसे भी उसने ख़त्म कर दिया | अब अनामिका को राजीव से मिलने की तीव्र इच्छा हो रही थी |

ये कह कह के हम दिल को समझा रहे है
कि वो अब चल चुके, वो अब आ रहे है।

आज वो दिन आ ही गया जिसका अनामिका को बेसब्री  से इंतज़ार था | जी हाँ .. आज रश्मि की बरात आने वाली थी और सबसे बड़ी बात कि राजीव भी आज ही आ रहा था |

अनामिका ने तो पूरा प्लान सोच रखा था कि राजीव से जैसे ही सामना होगा , सबसे पहले उसे उसकी नौकरी के लिए बधाई दूंगी और फिर रश्मि द्वारा पैदा की गई ग़लतफ़हमी को दूर करुँगी |

अनामिका  अकेले में कुर्सी पर बैठे आँखे मूंदे यह सब सोच रही थी …तभी राजीव चुप चाप सामने आकर खड़ा हो गया और अनामिका के आँखे खुलने का इंतज़ार करने लगा ………(क्रमशः )


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तुम्हारा इंतज़ार है ….5

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Categories: story

5 replies

  1. Good going with the first plot twist in the story making it an interesting and enjoyable reading. Looking forward to future episodes.👍

    Liked by 1 person

  2. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    अपनों का साथ बहुत आवश्यक है …
    सुख है तो बढ़ जाता है और
    दुःख हो तो बंट जाता है …||

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