तुम्हारा इंतज़ार है …3

पिता जी से अपनी आगे की पढाई जारी रखने की सहमती  मिलते ही अनामिका के चेहरे पर मुस्कान तो आई लेकिन उस मुस्कान के पीछे बहुत बड़ा राज़ छिपा था जिसे सिर्फ अनामिका का दिल ही जानता था |

वह पिता जी से आशीर्वाद प्राप्त कर अपने कमरे में आ गई और अपने कपडे और किताबें समेटने लगी | अब तो उसे पटना के किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन लेना ही था |

यह सत्य है कि राजीव के द्वारा जो मेरे दिल पर जख्म दिया गया है वह बराबर टीसता  रहता है  | शायद यह ज़ख्म तभी भरेगा जब ज़िन्दगी में मैं बड़ा मुकाम  हासिल ना कर लूँ…अनामिका मन ही मन सोच रही थी |

मुझे राजीव से भी पढाई में आगे निकलना  होगा तभी राजीव के सामने सिर उठा कर कह सकुंगी कि  देखो …जिसे तुम जाहिल – अनपढ़ समझ कर ठुकरा दिया था वह तुमसे भी आगे निकल चुकी है और समाज में इज्जत प्रतिष्ठा में तुमसे भी आगे है |

तुमने मेरे अंतरात्मा को ललकारा  है और जब एक औरत कुछ ठान लेती है तो उसे पूरा करने के लिए वह हर तरह की  मुसीबतों  का मुकाबला कर सकती है,  शायद मुझमे भी वो शक्ति मौजूद है |

तभी तो मैं राजीव के दुत्कार से रोने के बजाये मैं अपने जीवन में एक कड़ा  फैसला ले चुकी हूँ और वह यह कि अपने को इस समाज में उससे भी बड़ा बन कर दिखाना |  भगवान् मेरी  सहायता ज़रूर करेंगे |

वह अपने मन में पता नहीं और क्या क्या सोच  कर रही थी तभी माँ कमरे में आयी और कहा  …तुम पटना कब जाना चाहती हो बेटी  ?

मैं कल ही जाना चाहती हूँ माँ …अनामिका ने दृढ निश्चय से कहा |

तुम चली जाओगी तो मेरा मन नहीं लगेगा |  तुमसे बातें करके  मेरा दिन भर का थकान मिट जाता है …माँ  ने दुखी स्वर में  कहा |

पढाई करनी है तो जाना पड़ेगा ना माँ | वैसे बीच – बीच में तुमसे मिलने तो आती ही रहूंगी …अनामिका माँ के दुःख को महसूस कर रही थी |

तुम ठीक कहती हो, वैसे भी बच्चो की ख़ुशी से बढ़ कर माँ बाप के लिए कोई और ख़ुशी नहीं होती है | मैं चाहती हूँ .., तू जहाँ भी रहो,  खुश रहो  |

आज वो दिन भी आ गया |  पटना के साइंस कॉलेज में अनामिका को दाखिला मिल ही गया  | पटना के प्रतिष्ठित कॉलेज में  दाखिला  मिलने पर अनामिका बहुत खुश थी |

उसने सोचा था कि कॉलेज में दाखिला मिलने पर राजीव बधाई देने ज़रूर आएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ | लगता है जैसे राजीव अपने होस्टल से घर आना ही छोड़ दिया है |

 अनामिका को अपना वह संकल्प सदा याद रहता  है और वह उसे पूरा करने की दिशा में आज {कॉलेज में दाखिला लेकर)  पहला कदम रख चुकी है | अब तो उसे मेडिकल कॉलेज में दाखिला के लिए तैयारी करनी है  और एक बड़ा डॉक्टर बनना है,  तभी तो समाज में एक इंजिनियर से ज्यादा नाम और प्रतिष्ठा उसे मिल  पायेगी |

अनामिका अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए  रात दिन मिहनत करने लगी | पढाई के अलावा उसने अपने सारे शौक और मौजमस्ती  छोड़ चुकी थी |

उसमे यह बदलाव देख कर  घर वाले तो चकित थे ही, खास कर पिता जी तो बातों बातों में अनामिका से कह भी दिया था …., इतनी सीरियस पढाई करने की क्या ज़रुरत है | कुछ दिनों के बाद तो शादी करके तुझे चूल्हा – चौकी ही संभालना है |

परन्तु अनामिका कुछ ज़बाब नहीं दे सकी बल्कि मन ही मन अपने संकल्प को दुहराती रहती, जो अपने पिता को भी नहीं बता पाती थी  |

 अनामिका की  ज़िन्दगी में शायद किसी ने पहली बार उसके दिल को ठेस पहुंचाई थी | राजीव को तो इसका उचित ज़बाब देना ही होगा |

    अनामिका के मिहनत में उसकी छोटी बहन रश्मि का भी बड़ा योगदान  रहता है,  वह हर कदम उसकी ज़रुरत के समय मदद करती है और रश्मि को  भी अनामिका के साथ रहने का एक फायदा हुआ है …उसकी पढाई भी सुधर गई है और वो भी अपने क्लास में अच्छे अंक लाने लगी है |

इससे मामा मामी भी बहुत खुश थे और अनामिका का विशेष ध्यान रखते थे |

समय भी कितनी तेज़ी गुजर जाती है | आज अनामिका का मेहनत  रंग लाई और पहले ही प्रयास में  वो मेडिकल में दाखिला के लिए क्वालीफाई कर गई |

घर में ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा | गाँव में पहली बार कोई मेडिकल की पढाई करने जा रही थी | राजेश्वर सिंह जी ने इस ख़ुशी में पुरे गाँव में मिठाई बंटवाई | इस सफलता पर पूरा गाँव खुश था |

इस बार भी अनामिका ने सोचा था कि राजीव इतनी बड़ी सफलता पर तो ज़रूर बधाई देगा , परन्तु इस बार भी ऐसा कुछ नहीं हुआ |

अनामिका को बुरा तो लगा लेकिन उसके इरादे में रत्ती भर भी कमी नहीं आयी | और आगे भी उसने इसी तरह से मिहनत  जारी  रखने की ठान ली थी |

राजीव के बारे में जानकारी रश्मि से मिल जाया करती थी, लेकिन यह संयोग ही था कि इतने दिनों में एक बार भी राजीव से सामना नहीं हो सका  |

चाहे कितना भी कोशिश करती हूँ कि उसके बारे में नहीं सोचूं ..,लेकिन पता नहीं क्यों, ऐसा कोई दिन भी नहीं जाता जिस दिन उसे याद नहीं किया हो ..पता नहीं यह  कैसा  अनजाना  बंधन है…वह मन ही मन सोच रही थी और अपने सभी सामान बक्शे में पैक कर रही थी |

अनामिका को कॉलेज होस्टल मिल गया था और कल ही उसे शिफ्ट भी करना था |

 इसे संयोग ही कहा जा सकता है कि अनामिका का भी पटना मेडिकल  कॉलेज में दाखिला मिला था जो राजीव के इंजीनियरिंग  कॉलेज से मात्र ५०० मीटर के फासले पर था | लेकिन दिलों की दुरी शायद इससे बहुत ज्यादा थी , इसीलिए तो पिछली घटना के बाद एक बार भी आपसी मुलाकात नहीं हो सकी  |

सच कहूँ तो ऊपर से चाहे कितना भी नफरत करूँ  लेकिन सच्चाई यही  है कि राजीव की सादगी आकर्षित करती थी मुझे |…लेकिन अब इन सब बातों से क्या फायदा | जो हकीकत है उसी का सामना करना होगा  मुझे |

मुझको जाहिल – अनपढ़ समझने वाले को यह बतलाना चाहती हूँ  कि जब मैं  कोई भी चीज़ ठान लेती हूँ तो उसे पूरा करके  ही छोडती हूँ |

समय जैसे पंख लगा कर उड़ रहे थे  और देखते देखते राजीव की  इंजीनियरिंग की पढाई पूरी हो गई | वैसे पढने में तेज़ और मेहनती  तो था ही |  इसलिए तुरंत ही कैम्पस  सिलेक्शन भी हो गया |

पता चला है कि बोकारो स्टील प्लांट में ज्वाइन भी कर लिया है | चलो अच्छा हुआ | वो जो चाहता था उसे मिल गया है | अगर कभी मेरा उसका सामना हुआ तो बधाई ज़रूर दूंगी |  मैं उसकी तरह घमंडी नहीं हूँ |

समय तो जैसे तेज़ी से गतिमान है .. इसी बीच एक और ख़ुशी की बात हुई कि मेरी ममेरी बहन रश्मि की शादी भी तय हो गई और एक माह  के बाद ही शादी होनी है |

घर वाले तो सभी खुश थे लेकिन मुझे एक सहेली के दूर हो जाने का दुःख हो रहा था | लेकिन अगर किसी का घर बसता  है तो हमलोगों को ख़ुशी तो होनी ही चाहिए |

मैं आज ही  होस्टल से मामा जी के यहाँ आई थी  | शादी की तैयारी  जोरों से  चल रही थी  और ऐसे  मौके पर बहुत सारे काम होते है जिसमे सहयोग किया जा सकता है |

हालाँकि रश्मि शादी करने को तैयार नहीं हो रही थी |  पता नहीं उसके मन में क्या  चल रहा था | लेकिन माँ बाप की  इच्छा का विरोध नहीं कर सकी और दबाब के कारण  तैयार हुई थी |

राजीव के माता पिता लगभग रोज ही आते थे और घर के बहुत सारे कामो में अपना सहयोग देते | शादी में उनको निमंत्रण देना तो अनिवार्य था |

रश्मि से ही पता चला कि राजीव भी छुट्टी लेकर आ रहा है | आता क्यों नहीं, वह मामा – मामी की बहुत इज्जत करता है और रश्मि से भी उसकी दोस्ती है |

अब तो इंतज़ार है कब राजीव से सामना हो और  उसे उसकी उपलब्धि पर बधाई देकर उसे एहसास दिला सकूँ कि मेरी  सोच तुमसे बिलकुल अलग है |

तुमने तो कभी भी मुझे बधाई नहीं दी | लेकिन यह भी सच है कि आज जो कुछ  मैं बनने जा रही हूँ इसके जिम्मेवार भी तुम ही हो …(क्रमशः)

इससे पहले की घटना जानने  हेतु नीचे link पर click करे..

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