तलाश अपने सपनों की …16

भला हो उस  इंसान का जिसने ना सिर्फ संदीप के ट्रेन का टिकट कटा दिया, बल्कि इतनी भीड़ – भाड़ वाली बोगी में बैठने के लिए जगह  भी दिया | उसी के साथ बात करते हुए दो दिनों का सफ़र कैसे बीत गया ,पता ही नहीं चला |

सुबह के सात बज रहे थे और ट्रेन बिलकुल सही समय पर अपने  गंतव्य स्टेशन पर पहुँच गया |

संदीप ने सफ़र के उस साथी को धन्यवाद दिया और अपना  बैग लेकर प्लार्फोर्म नम्बर एक पर उतर गया |

प्लेटफार्म के बाहर ज्योंही निकला सामने बजरंग बाली के  मंदिर पर उसकी नज़र पड़ी | वह भगवान् के मंदिर में माथा टेकने  पहुँच गया |

उसी समय उसके मोबाइल पर रिंग टोन सुनाई पड़ा | शायद कोई मेसेज आया होगा …ऐसा सोच कर संदीप मोबाइल के मेसेज को चेक किया तो चौक गया |

जिसका डर था वही हुआ …सच, संदीप की नौकरी चली गयी | बिना छुट्टी स्वीकृति के ऑफिस छोड़ने के कारण उसके विरूद्ध कार्यवाही के तहत उसे बर्खास्त कर दिया गया था |

वह मंदिर परिसर में ही सिर पकड़ कर बैठ गया और आँखों में आँसू लिए भगवान् की तरफ देखा |

वह भगवान् के समक्ष हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया और मन ही मन कहा …और कितने परीक्षा लोगे   प्रभु | अब तो अपनी कृपा दिखाओ |

वह मंदिर से निकल कर दुखी मन से सोफ़िया के घर की ओर चल दिया | उसे पता था कि घर के सभी लोग उसी के पास है |

सोफ़िया का घर स्टेशन से कुछ ही दूर पर था , इसलिए रिक्शा से तुरंत ही पहुँच गया |

सबसे पहले संदीप की नज़र अपनी माँ पर पड़ी और उसने माँ पैर छू लिए | माँ ने आशीर्वाद दिया और साथ ही पूछ लिया….तू उदास क्यों है बेटा ?  घर आकर तो लोग खुश होते है |

हाँ माँ, अभी अभी कंपनी से मेसेज आया है | उन्होंने मुझे नौकरी  से निकाल दिया है …संदीप दुखी स्वर में बोला |

लेकिन क्यों?….माँ ने आश्चर्य से पूछा |

प्रोबेशन में छुट्टी का नियम नहीं है और मैं बिना छुट्टी के ही घर आ गया |

बातें हो ही रही थी कि सभी लोग वहाँ इकट्ठा हो गए और इस समाचार को सुन कर दुखी हो गए |

थोड़ी देर के लिए बिलकुल सन्नाटा छा गया | एक और दुःख का पहाड़ टूट पड़ा था |

कितनी मुश्किल से यह नौकरी मिली थी और मेरे कारण तुम्हारी वो नौकरी चली गई…राधिका ने दुखी होते हुए कहा |

नहीं राधिका, इसमें तुम्हारा क्या दोष है ? वक़्त के आगे सभी लोग मजबूर होते है | अभी बुरा वक़्त चल रहा है तो क्या हुआ | फिर अच्छा वक़्त भी आएगा ….संदीप ने राधिका की ओर देख कर कहा |

चलो भैया ,पहले नहा – धो कर कुछ खा लो | इस कठिन यात्रा से थकान हो गई होगी ….रेनू तौलिया देते हुए संदीप से बोली |

संदीप कपडे लेकर बाथरूम में चला गया तभी घर का कॉल बेल बज उठा | सभी कोई आशंका से एक दुसरे को देखने लगे | जब बुरा वक़्त चल रहा होता है ना ..तो दिमाग में सारे  नकारात्मक और उल्टे ख्याल ही आते है |

खैर , सोफ़िया ने जाकर दरवाज़ा खोला तो वकील साहब सामने खड़े थे | उनको देख कर सोफ़िया ने राहत की सांस ली  और कहा….अच्छा हुआ आप भी  आ गए | मैं आप को ही फ़ोन करने वाली थी |

मैं तो यह बताने आया था  कि सारे कागजात थानेदार को दे आया हूँ और वो किसी भी समय तहकीकात करने के लिए यहाँ आ सकते है … वकील साहब ने  सोफे पर बैठते हुए कहा |

ठीक है वकील साहब, मैं चाय लेकर आती हूँ….बोल कर सोफ़िया किचन में चली गई |

थोड़ी देर के बाद सोफ़िया चाय लेकर आई और तब तक संदीप और  बाकि लोग भी आकर वकील साहब के सामने बैठ गए |

थाना में जमा किये गए कागजात की कॉपी सोफ़िया को देते हुए वकील साहब ने कहा  …आप लोग इसे ध्यान से पढ़ कर समझ लीजिये | जब थानेदार साहब तहकीकात के समय कुछ पूछे तो वैसा ही ज़बाब देना है |

संदीप कागज लेकर ध्यान से देखने लगा और फिर बोला…यह तो ज़बाब सही दिया गया है , लेकिन राधिका के पिता अगर पुलिस को पैसे खिला कर हमलोगों को परेशान करने की कोशिश करेंगे तब हमें क्या करना होगा ?

इस बार सोफ़िया ने कहा …इन सब बातों का बस  एक ही जबाब है , तुम जितनी जल्द हो सके मैरिज ब्यूरो में अपना मैरिज रजिस्टर्ड करवा लो |

बिलकुल ठीक कह रही है सोफ़िया जी …वकील साहब  संदीप की ओर देखते हुए कहा |

संदीप बोला ….मैं तो चाहता हूँ कि राधिका को लेकर उसके पिता के पास एक बार जाऊँ और उनसे ही राधिका  का हाँथ मांग लूँ | शायद उनका गुस्सा शांत हो जाए और वो तैयार हो जाएँ |

नहीं नहीं,  ऐसा मत करना, वह इस रिश्ते को कभी नहीं मानेंगे …माँ ने तो साफ़ मना कर दिया |

काफी माथा पच्ची करने के बाद अंत में सब लोग इसी नतीजे पर पहुँचे कि रजिस्टर्ड – मैरिज करना ही इस समस्या का समाधान है |

लेकिन अभी तो मैं बेरोजगार हूँ , राधिका हमसे शादी क्यों करेगी …संदीप ने मज़ाक से कहा |

अभी मजाक करने का समय नहीं हैं संदीप  ….राधिका नाराज़ होते हुए बोली |

तभी कॉल बेल की आवाज़ सुनाई दी और सभी लोग शांत हो कर उस ओर देखने लगे |

सोफ़िया ने जाकर दरवाज़ा खोला तो देखा,  सामने थानेदार साहब खड़े है |

वकील साहेब को वहाँ  देख कर थानेदार साहब बोल पड़े …..आप भी यहाँ मौजूद है ?

जी थानेदार साहब , हमने तो पुरे पेपर थाना में ज़मा करवा दिए थे …वकील साहब ने कहा |

इसलिए तो तहकीकात करने आये है …थानेदार साहब ने जबाब दिया |

थानेदार भला आदमी लग रहा था,  उन्होंने बारी बारी से सब लोगों के बयान को कलमबद्ध किया |

तभी चाय आ गई और सभी लोग चाय पिने लगे |

चाय पिने के बाद संदीप के  बयान की बारी आई | संदीप ने कहा …मुझ पर राधिका के अपहरण का इल्जाम तो बिलकुल झूठा है | मैं तो आज ही मुंबई से आया हूँ और सबूत के तौर पर ट्रेन का टिकट और कंपनी द्वारा भेजे गए  अपने मोबाइल पर मेसेज को भी दिखाया |

आप इसका भी प्रिंट निकाल कर अपने बयान के साथ मुझे दीजिये | मुझे अब पूरा मामला समझ में आ चूका है |  राधिका के पिता ने आप सब लोगों को परेशान करने के लिए यह झूठी शिकायत दर्ज कराई है |

सभी का बयान लेने के बाद थानेदार साहब उठ कर चलने लगे | तभी संदीप ने उनसे पूछा …अब मुझे अपने घर में रहने में कोई परेशानी तो नहीं होगी ?

नहीं नहीं , आप आराम से अपने घर में जाकर रहिये …थानेदार साहब ने आश्वासन दिया | 

ठीक है थानेदार साहब , हम कल ही संदीप के मोबाइल का प्रिंट और ज़रूरी कागजात आप के पास जमा करा देंगे….सोफ़िया ने कहा और थानेदार को गेट तक छोड़ने आई | थान्रेदार जब जाने लगा तो सोफ़िया ने एक पैकेट थानेदार के हाथो में चुपके से थमाई  और कहा ….यह चाय पानी  के लिए है |  इसे आप  रख लीजिये |

थानेदार ख़ुशी ख़ुशी चला गया और सोफ़िया ने राहत की सांस ली |

अन्दर आते ही सोफ़िया  अपने वकील से बोली…राधिका मेरी बहन है ,इसे किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए | आप ज़रूरी कागजात बना कर थाना और कोर्ट जहाँ भी ज़रुरत पड़े आप प्रस्तुत कीजिये ताकि हमलोगों  किसी भी तरह से क़ानूनी  झंझट  से दूर रह सकें  |

एक बात और , अब संदीप भी आ ही चूका है तो कल ही मैरिज ब्यूरो में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन भी जमा करवा दीजिये |

लेकिन सोफ़िया जी,   कोर्ट, थाना और मैरिज के चक्कर में तो काफी पैसो की ज़रुरत पड़ेगी और अब तो मेरी नौकरी भी नहीं रही |

देखो संदीप, अब मैं भी अपने को तुम्हारे घर का ही सदस्य समझती हूँ | इसलिए इन सब बातों की चिंता तुम मत करो | मैं तुम लोगों से बड़ी हूँ , इसलिए बड़ी बहन का फ़र्ज़ अदा करने दो …सोफ़िया ने  भावुक हो कर कहा |

मैंने तो बेकार में ही तुम पर शक किया था …राधिका ने प्यार से सोफ़िया को देख कर कहा |

चलो अच्छा है, तुम्हारी वहम तो दूर हो गई | और हाँ एक प्लान और है मेरे पास ..सोफ़िया ने संदीप की ओर देखते हुए कहा |

संदीप आश्चर्य से सोफ़िया की ओर देख कर पूछा… कैसा प्लान ?

मैंने अपने बेटे के स्कूल के प्रिसिपल से तुम्हारी  नौकरी की बात पक्की कर ली है | तुम चाहो तो कल से ही वहाँ ज्वाइन कर सकते हो …सोफ़िया खुश हो कर बोली |

कल से मुझे भी अंकल पढ़ाना  शुरू करेंगे क्या ?……..सोफ़िया का बेटा बीच में बोल पड़ा |

हाँ हाँ,  क्यों नहीं….मैं तो आज से ही तुम्हे पढ़ाना शुरू कर देता हूँ …संदीप उसके सिर पर प्यार से हाथ रख कर कहा |

आज तो तुम खुद ही यात्रा से काफी थक चुके हो,  मेरा राजा बेटा कल से पढ़ेगा ….सोफ़िया बेटे को समझाते हुए बोली |

संदीप सोफ़िया से कहा ….सच, आप ने तो हर कदम पर मुझे मदद किया है चाहे मेरी समस्या हो या मेरे परिवार की | आप का यह उपकार हमेशा याद रखूँगा  |

और संदीप अपने परिवार को लेकर अपने घर जाने को तैयार हो गया |

सोफ़िया की इच्छा नहीं थी कि संदीप परिवार को लेकर अपने घर चला जाये, लेकिन सामाजिक बदनामी के कारण उनलोगों को रोक नहीं सकी …(क्रमशः) |

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

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