तलाश अपने सपनों की …11

संदीप आज  बहुत खुश था ,अपनी ड्यूटी  आने से पहले अपने रूम में रखे भगवान् के फोटो के सामने खड़े होकर प्रणाम किया और मन ही मन भगवान् से कहा …हे प्रभु, आज मेरी नौकरी के पुरे एक महीना हो चुके है और मुझे  यहाँ  सभी लोगों का सहयोग मिल रहा है | बस, अब मेरी राधिका वाली समस्या का समाधान निकालो प्रभु |

आप को कोटि कोटि नमन |

कंपनी द्वारा दिए हुए एक रूम में ही सभी सामान सलीके से सजा कर रखा था और खाने पीने  की भी अच्छी  सुविधा थी | एक महिना का समय कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला | अब तो बस कुछ दिनों की ही बात है जब मैं घर जाकर राधिका को अपनी नौकरी का सरप्राइज (surprise) दूँगा |

सचमुच राधिका तो ख़ुशी से पागल होकर गले लग जाएगी, क्योकि अब अपनी ज़िन्दगी की शुरुवात यही से करनी है |

और हाँ, अपने वादे के अनुसार पहली तनख्वाह (salary) से उसके  लिए अपनी पसंद का ड्रेस भी खरीद कर रखा है, जिसे अपने साथ लेता जाऊँगा |

संदीप इन्ही सब बातों को सोचता हुआ कंपनी की गाडी  में बैठ कर प्रोजेक्ट साईट पर जा रहा था | करीब आधे घंटे से  सुखद यात्रा का आनंद ले ही रहा था कि गाडी का अचानक ब्रेक लगने से संदीप की आँखे खुल गई और खिड़की से बाहर  देखा तो वह साईट पर पहुँच चूका था |

वह गाड़ी से बाहर निकला  तभी एक सुपरवाइजर दौड़ता हुआ संदीप के पास आया और कहा …नीलम मैडम आयी है और ऑफिस में आपका इंतज़ार कर रही है |

वह नीलम मैडम का नाम सुनकर थोडा घबडा  गया, क्योकि वह तो  संदीप की बॉस है | संदीप तो सिर्फ एक प्रोजेक्ट का इंचार्ज है , लेकिन मैडम के अधीन ऐसे पाँच प्रोजेक्ट हैं   जिसे वह बारी बारी से सभी का निरिक्षण करती रहती है |

संदीप लगभग दौड़ता हुआ भाग कर ऑफिस पहुँचा और अन्दर देखा तो नीलम मैडम कुर्सी  पर बैठी किसी फाइल में खोई हुई थी |

संदीप जैसे ही उनको प्रणाम किया, वो देखते हुए बोली…आओ संदीप, कैसे हो ?

मैं ठीक हूँ मैडम, आप कैसी है ?.. संदीप उनको देख कर पूछा |

हाँ संदीप, मैं भी ठीक हूँ | मैं तुम्हारे काम के प्रोग्रेस से बहुत खुश हूँ | मैं तो पहले समझी थी कि औरों की तरह तुम भी एक साधारण इंजिनियर हो |

लेकिन तुमने मेरी धारणा  को गलत साबित कर दिया  और अपनी  क्षमता का परिचय देते हुए तुमने इस प्रोजेक्ट में बहुत से नए टेकनिक (technique) का इस्तेमाल किया है | जिसके कारण तुम प्रोजेक्ट को समय सीमा से पहले ही पूरा कर लोगे,  तुम्हारे काम से ऐसा ही लग रहा है |

वेल डन संदीप (Well Done Sandeep …मैडम खुश हो कर बोली |

तभी चपरासी चाय और स्नैक्स (snacks) लेकर आ गया | दोनों  साथ चाय पी रहे थे, तभी संदीप हिम्मत करके अपनी छुट्टी के बारे में मैडम से निवेदन किया ताकि कुछ दिनों के लिए घर जा सके |

मैडम बोली…मैं तुम्हारी बात से सहमत हूँ संदीप, परन्तु मैं मजबूर हूँ |

एक तो प्रोजेक्ट के लिए एक एक दिन  महत्वपूर्ण है और दूसरा प्रोबशन (probation) में छुट्टी का प्रावधान नहीं है |

यहाँ के ऑफिस के एच्  आर मैनेजर (H R Manager)  को तुम्हारी  छुट्टी स्वीकृत करने का अधिकार भी  नहीं है |

अगर छुट्टी की  बहुत आवश्यकता है तो कंपनी के चेयरमैन (chairman) ही  स्पेशल केस में छुट्टी दे सकते है | हालाँकि इसमें तुम्हारा ही नुक्सान है ..क्योंकि जितने दिन की छुट्टी  तुम्हे मिलेगी उतना दिन और तुम्हारा probation बढ़ जायेगा |

इसलिए तो मेरी राय है कि अभी छुट्टी के बारे में मत सोचो बल्कि अपने काम पर ध्यान दो, जिससे तुम्हारा  रेटिंग  अच्छा हो सके और आगे भविष्य में तुम्हारा प्रमोशन (promoton) जल्दी हो सके |

इतना कह कर मैडम ने चाय समाप्त किया और  अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गई |

संदीप भी पीछे पीछे चल कर मैडम को उनकी गाड़ी तक छोड़ने आया | 

इधर राधिका का शादी ना करने की जिद करना और ऊँची आवाज़ में बात करना उसके पिता जी को नागवार गुजरा |

जैसे ही राधिका की माँ उसकी मनःस्थिति को बतलाने अपने पति के पास पहुंची… वो गुस्से में विफरते हुए बोले…आज तक इस घर में किसी ने ऊँची आवाज़ में मेरे सामने बात नहीं की है, लेकिन राधिका  इस घर के सारे कायदे क़ानून को ताक में रख कर पुरे समाज में मेरी नाक कटवाने पर तुली हुई है |

शादी तो वहीँ करनी होगी जहाँ मैं चाहूँगा | यही मेरा फैसला है, और इस सम्बन्ध में तुम्हारी कोई बात सुनना नहीं चाहता हूँ |

जाकर उसे समझा दो कि अपनी जिद छोड़ दे और मेरी बात मान ले | हमलोग उसकी भलाई चाहते है और उसके अच्छे भविष्य के लिए ही काफी खोज बिन करने के बाद अच्छा परिवार और नौकरी करने वाला लड़के को हमलोगों ने पसंद किया है |

 राधिका की माँ आगे कुछ ना बोल सकी और अपनी आँखों में आँसू लिए वापस अपने कमरे में आ गयी |

राधिका ने  भी पिता जी की  बात को सुना और उसका दिल जोर से घबड़ाने लगा | वह स्टडी टेबल पर बैठी  पढाई कर रही थी | लेकिन अब अपनी किताब को बंद कर आँखे मूँद ली और भगवान् को याद करने लगी |

समझ में नहीं आ रहा था कि उसके भाग्य में क्या लिखा है ?

उसके आँखों से गिरते आँसू उसके कॉपी में लिखे अक्षरों को मिटा  रहे थे लेकिन उसके दिल पर लिखे संदीप का नाम इन आँसुओं से मिटना मुश्किल लग रहा था |

अब तो राधिका का दिल कह रहा था …..परीक्षा में फेल तो होगी ही, ज़िन्दगी के इम्तिहान में भी वह फेल होने वाली है |

वह टेबल पर सिर रख ना जाने कब तक रोती रही और कब नींद लग गई उसे पता ही नहीं चला |

कुछ देर के बाद  उसकी नींद तब खुली जब माँ ने आकर उसे झकझोर कर उठाते हुए कहा … राधिका,  अगर तुम्हे नींद आ रही है तो पहले खाना खा लो और फिर बिस्तर पर सो जाओ | कल सुबह उठ कर पढाई करना  |

इस पर राधिका ने अलसाई हुई आवाज़ में बोली ..माँ, मुझे भूख नहीं है और  अब ध्यान से मेरी पढाई भी नहीं हो पायेगी |

अब पढने से क्या फायदा माँ , जब मुझे पता है कि  ऐसे माहौल में मेरा पास करना बहुत मुश्किल है |

माँ राधिका तो प्यार से समझाते हुए कहा ..देखो बेटी, मैंने तो अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया, परन्तु  तुम्हारे पिता जी मेरी बात सुनने के लिए तैयार ही नहीं है  तो मैं क्या कर सकती हूँ  |

भला इसी में है कि तुम भी अपना गुस्सा छोड़ दो और अपने पिता की बात मन लो , हमलोग तो तुम्हारे माता पिता है  कोई दुश्मन नहीं  |

मेरी माँ , अगर मेरा भला चाहती हो तो मुझे अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार देना होगा, तभी मैं आगे की ज़िन्दगी में खुश रह पाउंगी |

सच माँ, मैं संदीप के अलावा किसी से भी शादी नहीं कर सकती, भले ही मुझे ज़िन्दगी भर कुँवारी रहना पड़े |

इधर संदीप डिनर करके अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गया | वह बिस्तर पर लेटा  हुआ सोच रहा था कि  अब तो छुट्टी मिलने की आशा पर पानी फिर चूका है | तभी उसके मन में ख्याल आया कि अपनी बहन रेनू को फ़ोन कर घर का हाल  समाचार जान लिया जाये और फिर तुरंत ही उसने रेनू को फ़ोन लगा दिया |

उधर से रेनू की आवाज़ आयी …आप कैसे हो भैया ?

मैं तो यहाँ बहुत मज़े में हूँ यहाँ किसी बात की कमी नहीं है |

तुम लोग वहाँ ठीक से हो ना ?… संदीप ने रेनू के पूछा |

यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है भैया | एक दिन राधिका आयी थी यहाँ | उसका तो रो रो कर बुरा हाल था | उसके घर वाले उसकी शादी कही दूसरी ज़गह करने जा रहे है ..रेनू ने दुखी होकर कहा |

यह तुम क्या कह रही हो रेनू ? मुझे तो राधिका ने बताया ही नहीं | लगता है वह अभी तक हमसे गुस्सा है | ऐसा ना हो कि गुस्सा में वह अपने माता पिता की बात माँ ले ..उसने रेनू से अपने मन की बात बात दिया |

तुम तो राधिका से बात कर सकते थे ?.. रेनू ने शिकायत भरी अंदाज़ में कहा |

ठीक है रेनू, मैं अभी उससे बात करता हूँ…इतना बोल कर संदीप फ़ोन काट दिया और अपनी आंखे बंद कर महसूस कर रहा था … अकेली राधिका कितने तनाव से गुज़र रही होगी…..(क्रमशः)

इससे बाद की घटना हेतु नीचे link पर click करे..

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

2 thoughts on “तलाश अपने सपनों की …11

    1. You are right sir , The story is going to end shortly but happy or sad ending not yet finalized.
      I have asked you earlier , please suggest …
      thank you sir, Stay connected…

      Like

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