तलाश अपने सपनों की …2

आज संदीप बहुत खुश था क्योंकि शाम का वक़्त और वो एक  छोटे से पार्क में बैठ कर राधिका से अपने दिल की बात कह रहा था और राधिका भी अपनी मन की बात खुल कर रख रही थी | राधिका बहुत दिनों के बाद संदीप के चेहरे पर ख़ुशी देख रही थी |

उसने संदीप को समझाते हुए कहा … तुम चिंता मत करो,  मैं अपने पापा को किसी तरह से मना लुंगी और माँ तो मेरी ख़ुशी में ही अपनी ख़ुशी ढूंढती है |

तुम बस अपने  मन को शांत कर इंटरव्यू की तैयारी करो | एक न एक दिन सफलता ज़रूर मिलेंगी,  मुझे पूरा विश्वास है |

वो तो ठीक है राधिका, लेकिन मैं तुमसे  कुछ और भी बात करना चाहता हूँ ..उसने राधिका की ओर देखते हुए कहा |

राधिका उसकी आँखों में आश्चर्य से देखते हुए बोली ….और कौन सी बात कहना चाहते हो ?

तुम तो “आई लव यू”  कितनी बार कह चुके हो…राधिका बोली और  खिलखिला कर हँस पड़ी |

सच राधिका, आज मैं मज़ाक के मूड में बिलकुल नहीं  हूँ …उसने राधिका की ओर देखते हुए कहा |

राधिका अचानक उसकी बात सुन कर शांत हो गई और …उसकी हाथ को अपने हाथ में लेकर बोली ….तुम आजकल इतने  परेशान क्यों रहते हों ?

तुम पढ़े लिखे हो और इंजीनियरिंग की पढाई की है | ठीक है अभी नौकरी नहीं लगी, इसका मतलब थोड़े ही ना है कि कभी भी नौकरी नहीं मिलेगी ….राधिका प्यार से उसको दिलासा दे रही थी |

बात ऐसी है  राधिका ….. बिना काम के घर में बैठे समय बिताना मुश्किल हो रहा है | और मुझे मालूम हुआ है कि तुम्हारी एक जान पहचान की कोई  सोफ़िया भाभी है |  शायद उसके बच्चे के लिए एक टिउटर  (tutor) की ज़रुरत है |  तुम उनसे बात करो तो शायद मुझे यह काम मिल जाये |

अच्छा तो अब मास्टर जी बनोगे | ज़रूर यह आईडिया रेनू ने दिया होगा | उसने भी मुझे कितनी बार अपने लिए कह चुकी है, लेकिन मैं ने उससे कहा था …अभी इसकी क्या ज़रुरत है |

हाँ ज़रुरत है राधिका,  मुझे ज़रुरत है ….इससे मैं पढाई – लिखाई से जुड़ा  रहूँगा और चार पैसे भी पॉकेट खर्च के आयेंगे …संदीप ने राधिका की ओर मिन्नत भरी नज़रों से देखा |

लेकिन एक शर्त पर तुम्हारा यह काम कर दूंगी …राधिका  हँसते हुए बोली |

शर्त, कैसा शर्त राधिका …संदीप प्रश्नभरी नजरो से देखा |

तुम्हे अपनी पहली सैलरी से मुझे एक ड्रेस दिलवाना होगा, बोलो है मंज़ूर ?… संदीप को देखते हुए बोली |

संदीप उसके सिर पर हाथ रखते हुए कहा …तुमने शर्त वाली बात कह  कर मुझे तो डरा ही दिया था |

बस, मुझे नौकरी लगने दो राधिका  | मैं तुम्हारी हर एक  इच्छा पूरी करूँगा |

मुझे पता है, तुम्हारी मज़बूरी संदीप  …..मैंने तो ऐसे ही तुम्हे छेड़ने के लिए कहा था |

तुम्हारा  सीरियस चेहरा बिलकुल अच्छा नहीं लगता है | तुम पहले कितना खुश रहा करते थे और गुस्सा भी उतना ही करते थे |

मुझे आज भी याद आता है तुम्हारा वो थप्पड़ जो तुमने सिर्फ इस बात के लिए मुझे मारा था कि तुम्हारी वो नयी  किताब के दो पन्ने नोक झोक में फट गए थे..राधिका शिकायत भरी लहजे में बोली |

अच्छा तो वो बचपन की घटना आज भी तुम्हे याद है | चलो उसके लिए मैं आज माफ़ी मांगता हूँ ..संदीप बोला और उसका हाथ पकड़ कर उठाते हुए कहा … अब हमलोग को वापस चलना चाहिए, वर्ना तुम्हारे पिता जी मुझे यहाँ देख लेंगे तो उनका चप्पल – मेरा सर ….दोनों हंस पड़े और अपने अपने घर के रास्ते हो लिए |

आज सुबह सुबह रेनू चाय लेकर आयी और लगभग चिल्लाते हुए बोली…भैया, तुम इतनी देर तक सोते रहोगे तो तुम्हारा स्वास्थ ख़राब हो जायेगा | चलो उठो और चाय पीकर बाज़ार से कुछ सब्जी ले आओ, नहीं तो आज खाना भी नहीं बन पायेगा |

माँ नहा धोकर पूजा करने मंदिर गई है | वो रोज़ इस समय मंदिर जाकर तुम्हारे लिए भगवान् से तुम्हारी नौकरी के लिए प्रार्थना करती है और तुम हो कि ऐसे समय में सोये रहते हो |  ऐसे में तो तुम्हारा भाग्य जागेगा कैसे ?

अच्छा बाबा, बाज़ार जाता हूँ और अब ज्यादा बक बक मत कर और चाय इधर दे…संदीप बिस्तर पर उठ बैठा |

रेनू उसके हाथ में चाय की प्याली  दी ही थी कि संदीप के मोबाइल पर रिंग हुआ,  शायद कोई मेसेज था |

उसने चाय पीते हुए मेसेज को पढ़ा …,डिअर संदीप,  मैंने  तुम्हारा काम कर दिया है | तुम आज ही  शाम को सोफ़िया भाभी के घर चले जाना | आज  कॉलेज बंद होने के कारण मेरा घर से निकलना संभव नहीं है …राधिका |

 मेसेज पढ़ कर संदीप उछल पड़ा और पास खड़ी रेनू भी खुश होकर बोली….चलो तुम्हारे  अच्छे दिन आने शुरू हो चुके है |

संदीप जल्दी से चाय समाप्त कर सब्जी लाने हेतु बाज़ार निकल  पड़ा | आज उसका मन हुआ कि राधिका के घर से सामने वाले रास्ते से हो कर गुजरेगा और अगर राधिका दिख गयी तो उसे धन्यवाद देता आऊंगा |

लेकिन उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी | राधिका के ऊपर इतने बंदिशे है कि वो फ़ोन से भी बात  नहीं कर पाती इसलिए सिर्फ मेसेज से ही बात हो पाती है |

खैर,  वो राधिका को मन ही मन धन्यवाद दिया और सब्जी लेता हुआ घर वापस आ गया |  संदीप को  ट्यूशन  क्या मिली, उसे इतनी ख़ुशी हो रही थी कि जैसे उसे नौकरी ही मिल गई हो | संदीप शाम होने का बेसब्री से इंतज़ार करने लगा |

शाम भी आई और संदीप तैयार होकर सोफ़िया भाभी के घर के लिए निकल पड़ा ….फिर वह कुछ ही देर में सोफ़िया भाभी के घर के दरवाजे पर खड़ा था | उसने धड़कते दिल से दरवाज़े की घंटी बजा दी और दरवाज़ा खुलने का इंतज़ार करने लगा  |

दरवाज़ा खुलने में ज्यो ज्यो देर हो रही थी उसके दिल की धड़कन  भी बढती जा रही थी |

उसे लगा, कही  गलत घर में तो नहीं आ गया हूँ  ?

उसने वापस घर से बाहर  निकल कर गेट पर लगे नेम-प्लेट को दोबारा अच्छी तरह पढ़ा और आश्वस्त हो गया कि  वह  सही पते पर पहुँचा हैं |

तभी दरवाज़ा खुला और एक महिला की सुरीली आवाज़ आई….कौन है ?

वह जल्दी से दरवाज़ा के पास पहुँचा और बोला ….जी, मैं हूँ  |

सामने एक ३० -३५   साल की सुन्दर सी महिला  दरवाज़े पर खड़ी थी |

और उसने पूछा….. कहिये क्या काम है ?

मुझे सोफ़िया जी से मिलना है ..संदीप ने हडबडा कर बोला |

मैं ही सोफ़िया हूँ,, कहिये क्या काम है ? …उसने मुझे प्रश्नभरी निगारों से देखा |

दरअसल, राधिका ने आप से मिलने के लिए कहा था …उसने यहाँ आने की वज़ह बताया |

अरे हाँ,  तो आप ही है संदीप जी |  आइये, अन्दर आइये …उसने संदीप को अन्दर अपने ड्राइंग रूम में आने का इशारा किया |

उसके पीछे पीछे संदीप भी ड्राइंग रूम में पहुँच गया |

घर तो बहुत शानदार था और सलीके से सजाया हुआ भी था | ऐसा लगता है जैसे बहुत पैसे वाले रईस लोग है . ..संदीप मन ही मन बोला और सोफे पर बैठते हुए चारो तरफ नज़रे घुमाई |

सोफ़िया तब तक  किचेन से पानी लेकर आ गई और संदीप को देते  हुए बोली… आप को तो राधिका बता दी होगी कि मेरा  एक छोटा बेटा है जिसे पढ़ाना है |

हाँ, इसीलिए तो मैं यहाँ आया हूँ …संदीप पानी का गिलास लेते हुए बोला |

लेकिन मैं एक बात और भी बताना चाहती हूँ, और यह कि बच्चा थोडा  शरारती है |

मेरे लाड – प्यार ने थोडा उसे बिगाड़  दिया है  | अतः शुरू में थोड़ी परेशानी हो सकती  है …क्योंकि आप को उसको पढ़ाने  के अलावा उसके शरारतों को भी झेलना पड़ेगा |

वैसे इसके लिए मैं आपको अच्छी फीस दूंगी,   क्या आप को पढ़ाना मंज़ूर है ? ..उसने संदीप के  आँखों में देखते हुए कहा |

संदीप उसकी नशीली आखों के ताप को बर्दास्त नहीं कर पा रहा था और उसने कपडे भी कुछ ऐसे ही पहन रखे थे |  अतः संदीप अपनी नज़रों को इधर – उधर चुराता  बात कर रहा था |

संदीप ने कहा …..मैं अपनी तरफ से पूरा प्रयास करूँगा और आप को शिकायत का कोई मौका नहीं दूंगा  |

सोफ़िया मैडम संदीप की विश्वासभरी बातें सुन कर खुश हो गयी और कहा ….मैं आप को इसके  लिए ५००० रूपये प्रति माह दूंगी |

संदीप की आँखे फटी की फटी रह  गयी |  इतने पैसों में तो पुरे घर को पढ़ा दूंगा ..वह मन ही मन कहा |

सोफ़िया मैडम की बात  सुन कर संदीप खुश होकर पूछा …कब से मुझे पढ़ाना है ?

आप चाहो तो आज से ही यह काम कर सकते है ….शायद  उसे संदीप की सादगी और उसकी मनमोहक लुक बहुत पसंद आयी |

संदीप ने फिर पूछा …आपका बेटा कहाँ है ?  उससे मिलना चाहूँगा |

हाँ – हाँ , क्यों नहीं !  वो बाहर ही खेल रहा होगा , मैं अभी उसे बुलाती हूँ |

और थोड़े देर में ही एक सुन्दर सा, सीधा सा दिखने वाला बच्चा आया और सलीके से प्रणाम किया |

संदीप उसे पास बैठाते  हुए  पूछा….आप का क्या नाम है ?

प्रणव नाम है मेरा, …. उसने आज्ञाकारी छात्र की तरह ज़बाब दिया |

वैरी गुड , आप तो बहुत अच्छे बच्चे हो …संदीप उसकी ओर देख कर बोला और अपने पॉकेट से एक चाकलेट निकाल  कर दिया ताकि ज़ल्दी ही उससे दोस्ती हो जाए…….(क्रमशः)  |

इससे बाद की कहानी हेतु नीचे दिए link को click करें…

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I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

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