# रिक्शावाला की अजीब कहानी #…13

कोई तेरे पंखो को जाकड़ ना सके…

कर बुलंद इतना अपने उड़ान से  ..

कर खुद पर भरोसा और बाजुओं पर

सफ़र होंगे तुम्हारे पूरी शान से …

मैं अपनी मुँह बोली बहन को रिक्शे में बैठा कर अपनी धुन में चला जा रहा था तभी उसका पति जो उसके साथ ही बैठा था , मुझसे पूछा …अरे भाई, हमलोग इतने दूर तक एक साथ सफ़र कर लिए. साथ साथ खाना – पीना भी हुआ |

लेकिन अभी तक तो तुमने अपने बारे में कुछ बताया ही नहीं |

क्या करें दोस्त, जब दिन बुरे चल रहे हो तो पल पल घटनाएँ बदलते रहती है और उसी तरह अपने विचार भी …मैं दुखी हो कर कहा |

मैं तो पिछले छह महीने से अपनी पत्नी से मिला भी नहीं हूँ | तुम तो इतने भाग्यशाली हो कि तुम्हारी जीवन संगनी तुम्हारे साथ है और तुम्हारा एक नन्हा मेहमान भी आने वाला है |

मैं दरभंगा जिले  के एक छोटे से गाँव “मुरैना” का रहने वाला हूँ | घर में मेरी बीबी और माँ है | मैं यही वाराणसी में रिक्शा चलाता था | अब इस बनारस नगरी को हमेशा के लिए छोड़ कर जा रहा हूँ |

तुम ठीक कहते हो भाई,  जब गर्दिश में समय होता है तो अपनी पहचान ही मिटती नज़र आती है |

देखो ना, मैं बनारस में मिस्त्री बन कर लोगों के घर की ईट जोड़ता था और आज ऐसी स्थिति हो गयी है कि अपने  ही घर की नीव हिल गयी  |

मैं समझा नहीं भाई …मैंने पूछा  |

मेरी माँ गाँव में गुज़र गई है | पिता जी हमारा बाँट जोह रहे है कि कब  मैं वहाँ पहुँच जाऊँ और   क्रिया – कर्म में भाग ले सकूँ | इसीलिए तो मज़बूरी में पैदल ही गर्भवती पत्नी को भी साथ ले जाना पड़ रहा है | 

तुम मिल  गए तो ऐसा लगा इस गर्मी में भगवान् ने तुम्हे मेरे लिए ही भेजा  दिया है | इन्ही सब बातों को करते हुए रास्ता कट रहा था |

चूँकि हमलोग को हाईवे पर आगे जाने से रोक दिया था , इसलिए  दूसरी पगडण्डी वाला रास्ता पकड़ लिया  जो पास के गाँव से हो कर जाती है |

थोड़ी दूर चलने के बाद हमलोग वापस हाईवे वाले रास्ते  पर आ गए और हमलोग का रिक्शा तेज़ गति से आगे बढ़ने लगा |

अचानक मिस्त्री भाई ने कहा ….अरे, रिक्शा रोको भाई |

मैंने हडबडा कर रिक्शा रोक दी , लेकिन समझ में नहीं आयी कि ऐसी क्या बात हो गई |

तभी सड़क के किनारे एक झोपड़ी में चाय की दूकान दिखाई दी |

मिस्त्री भाई रिक्शे से उतर कर बोले …आओ भाई, थोड़ी चाय पी कर थकान को कम करें |

मैं भी रिक्शा चलाते हुए थक चूका था , इसलिए मुझे भी चाय की तलब हो रही थी लेकिन पास में पैसा नहीं होने के कारण चुप चाप चला जा रहा था |

मुझे मिस्त्री भाई की बात सुन कर ही शरीर  में स्फूर्ति आ गई |

रिक्शा पर बैठी बहना भी बोल पड़ी…हम भी चाय पियेंगे |

हम तीनो ने चाय पी और अपनी सवारी फिर सड़क पर चल पड़ी | 

अभी थोड़ी  दूर ही आगे गए थे कि हमलोग ने देखा कि सड़क के किनारे कुछ भीड़ लगी हुई है |

मैं रिक्शा को पास ले जा कर रोका और  तभी हमने देखा ….एक बृद्ध आदमी सड़क पर गिरा छटपटा रहा है |

मैंने पूछा…. क्या हुआ बाबा को ?

पास  खड़े लोगों ने बताया कि एक गाड़ी  धक्का मार कर भाग गया है | काफी खून बह रहा है |

इन्हें ज़ल्दी हॉस्पिटल ले जाना ज़रूरी है | लेकिन कोई भी गाड़ी इधर से गुज़रता है ,वो मदद के लिए रुकता ही नहीं है |

हम लोगों को उनकी हालत देख कर दया आ गई |

मैंने पूछा …यहाँ से हॉस्पिटल कितना दूर है ?

बस दो किलोमीटर ही है यहाँ से | कृपा करके इन्हें पहुँचा दीजिये तो इनकी जान बच जाएगी |

बहना रिक्शे से उतरते हुए बोली …हाँ हाँ,  क्यों नहीं |

बहना रिक्शे से उतर गई और  बोली …भैया पहले इस बूढ़े बाबा को हॉस्पिटल पहुँचा दो |            मैं पीछे से दो किलोमीटर पैदल चल कर वहाँ तक आ जाउंगी  |

मैं लोगों की मदद से किसी तरह बूढ़े बाबा को रिक्शा पर बैठाया और तेज़ गति से चलता हुआ  हॉस्पिटल पहुँच गया |

डॉ ने उनका इलाज शुरू किया और कहा ..खून काफी निकल गया है | अगर थोड़ी देर और हो जाती तो इनको बचा पाना संभव नही था |

मैंने भगवान्  को धन्यवाद् दिया कि मेरे हाथों बूढ़े बाबा की जान बच गई |

तभी उनके साथ आये व्यक्ति जो शायद उनका बेटा था, मेरे हाथ में कुछ पैसे देते हुए कहा …आप इसे रख लीजिये,  रास्ते में आपके  काम आयेंगे | आप ने मेरे बाबा की जान बचने में मदद की |

मैं हाथ जोड़ कर उनको नमस्कार किया और हॉस्पिटल से बाहर निकला तो देखा मिस्त्री भाई अपनी  पत्नी को लेकर पहुँच गए हैं |

मिस्त्री भाई ने पूछा …बाबा की हालत कैसी है ?

डॉक्टर साहेब ने कहा है कि … अब खतरे से बाहर है | बिलकुल सही समय पर उनको इलाज़ मिल गया वर्ना देर होने से बचना मुश्किल था | भगवान् का लाख – लाख शुक्र है |

चलो अच्छी बात है,  आपको इसका पुण्य मिलेगा …बहना ने हँसते हुए कहा |

इस पर मिस्त्री भाई भी बोल पड़े …हमलोग को रिक्शा में ले जा रहे है, उसका भी तो पुण्य मिलेगा ?

हाँ ..सही है,  इन्ही सब पुण्य के बदौलत भैया जी अपने गाँव आराम से पहुँच जायेंगे और वहाँ सब लोग को कुशल मंगल पाएंगे …बहना ने कहा |

देखते देखते रास्ता कट गया और अब समय आ गया कि मिस्त्री भाई अपने गाँव में दाखिल होने जा रहे थे |

हमारा गाँव तो आ गया भाई | अब यहाँ से हमारा – तुम्हारा साथ छुट जायेगा ..मिस्त्री भाई ने कहा |

इस हाईवे रोड से कितना अन्दर है आप का गाँव …..मैंने पूछा |

बस यहाँ से दो किलोमीटर ही अन्दर है | लेकिन  यहाँ से दूसरी कोई सवारी नहीं मिलेगी इसलिए पैदल ही जाना होगा ,,,मिस्त्री भाई ने कहा |

इतनी रात में ऐसी सुनसान रास्तो पर पत्नी को ले जाने में आपको डर नहीं लगेगा ..हमने फिर पूछा |

नहीं नहीं,  यह तो अपना गाँव है , सभी लोग एक दुसरे को जानते है |

तभी बहना बोल पड़ी …चलो ना भैया  आप भी मेरे घर | खाना खा कर रात में वही आराम करना और सुबह फिर अपने रास्ते चले जाना |

मुझे उसका सुझाव सही लगा | इसलिए वापस उनलोगों को रिक्शा पर बैठा कर उनके गाँव की ओर चल दिया |

करीब एक किलोमीटर चलने के बाद,  रास्ते  में एक आदमी आता दिखाई दिया |

उसने पास आ कर हमलोग को रोक कर तहकीकात करने लगा कि कोई बाहरी आदमी तो नहीं गाँव में घुस रहा है |

तभी मिस्त्री भाई उसको देख कर बोल पड़े…अरे पकिया,  इतनी रात को इधर कहाँ जा रहा है ?

अरे भैया, आप है | अच्छा हुआ आप जल्दी पहुँच गए, अभी तो सात दिन तक आपको quarantine में रखा जायगा | यही गाँव के स्कूल में सेंटर बनाया गया है |

सात दिनों के बाद ही अपने घर में घुस पाएंगे | ऐसा यहाँ सरकार का आदेश है |

तब तो हमें आप के साथ जाना ठीक नहीं होगा , वर्ना हमें भी सात दिनों तक बंधक बना लेंगे …मैं ने आशंकित हो कर कहा |

तुम ठीक कहते हो भाई,  हमलोग को यहाँ उतार दो और तुम अपने रास्ते  लौट जाओ |

हमलोग यहाँ से पैदल ही चले जायेंगे …मिस्त्री भाई रिक्शे से सामान उतारते हुए कहा |

रात काफी हो चुकी थी और थकान भी हो रही थी | इसलिए हमने सोचा, आगे कुछ दूर हाईवे पर ही कही रुक कर आराम कर लूँगा |

रिक्शा वापस घुमाया ही था कि बहना ने आवाज़ लगा दी …रुको भैया | मेरे पास कुछ सत्तू और गुड़ है इसे रख लो | अभी तुम्हे भूख लगी होगी | मुझे तो यहाँ खाना मिल हो जायेगा | तुम्हारी यात्रा शुभ हो |

मैं एक बार फिर आसमान की तरफ देख कर भगवान् को धन्यवाद दिया |

अब तक तो रास्ता ठीक से ही कट रहा था | आगे भी भगवान् इसी तरह कोई ना कोई जुगाड़ भेज ही देंगे  | मैं ख़ुशी ख़ुशी रिक्शे पर बैठा और जाते जाते पीछे मुड कर देखा …बहना हाथ हिला कर मुझे सफल यात्रा की शुभकामना दे रही थी …….(क्रमशः)

इससे आगे की घटना जानने के लिए नीचे दिए link को click करें…

रिक्शावाला की अजीब कहानी …14

BE HAPPY… BE ACTIVE … BE FOCUSED ….. BE ALIVE,,

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6 replies

  1. Hardships and struggles of migrant labourers very well narrated in this story. Good going Vermaji.

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  2. Nice. Enjoyed.

    Liked by 1 person

  3. Thank you dear,
    stay connected and stay happy..

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  4. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    गुरु बिना ज्ञान नहीं, ज्ञान बिना आत्मा नहीं ..
    ध्यान,ज्ञान,धैर्य और कर्म सब गुरु की ही दें है …
    गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं ..

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  1. रिक्शावाला की अजीब कहानी .…12 – Retiredकलम

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