# नमक हराम #….8

इमानदारी की राह पर चलते चलते पहुँच गया हूँ बेईमान शहर में हर कदम पर ठोकर हूँ खाता गिर जाता हूँ खुद की नजर में… ज़माना बेईमान हो गया राजेश्वर जैसे ही सुना कि उसका खेत कोई दूसरा आदमी जोत … Continue reading # नमक हराम #….8