# अदालत की जंग #….2

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ढूँढ तो लेते कभी का तुम्हे

शहर में भीड़  इतनी भी न थी

पर रोक दी तलाश हमने जब जाना 

खोये नहीं बल्कि  बदल गए थे तुम ||

रात के आठ बज रहे थे और चौपाल में राजेश्वर पहुँचा तो देखा गाँव के सरपंच साहब और कुछ लोग हुक्का पी रहे है और फसल की पटवन के बारे में  चर्चा कर रहे है |  इस बार बारिस कम होने के कारण फसल पानी के बिना बर्बाद हो रहे है |

आओ राजेश्वर,  बहुत दिनों के बाद दिखाई पड़  रहे हो…सरपंच साहब  हँसते हुए बोले |

तभी गाँव का खलीफा नरपत सिंह बोल पड़े… आज कल राजेश्वर परेशान है | सुना है राजेश्वर और उसके छोटे भाई के बीच ज़मीन को लेकर विवाद चल रहा है |

सभी लोग राजेश्वर की ओर देखने लगे |

राजेश्वर भी उन्ही के बीच बिछी चटाई पर बैठते हुए बोला ..हाँ खलीफा, ठीक ही सुना है |

तो तुमने क्या फैसला लिया है …इस बार सरपंच साहब ने पूछा |

अभी कोई फैसला नहीं लिया है… …राजेश्वर बस इतना ही बोल कर चुप हो गए |

तुम पंचायती क्यों नहीं करा देते  राजेश्वर ….सब लोग एक साथ बोल पड़े |

अभी सोचता हूँ उसे एक मौका दूँ ताकि वो अपनी गलती सुधार सके …राजेश्वर दुखी स्वर में बोला |

सच कहता हूँ, आज कल सीधा बनने का ज़माना नहीं है,  घी हमेशा टेढ़ी ऊँगली से ही निकलता है | तुम जल्दी से कोई उपाय करो, वर्ना कही देर ना हो जाये ….खलीफा उसे समझाते हुए बोला |

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चौपाल में बैठे लोगों के बातें सुन कर उसका मन और भी घबड़ाने लगा |  वह एक  बहाना बना कर वहाँ से चल दिया और घर पहुँच कर आँगन में बिछे चारपाई पर लेट गया और अपनी आँखे बंद कर सोच में डूब गया |

उठो जी,  पानी पी लो …कौशल्या लोटा थमाते हुए बोली | और हाँ, कल के जैसा यही मत सो जाना | घर के अंदर बिस्तर लगा दिया है |

और सुनो,  कल माताजी के मंदिर में पूजा  करने जायेंगे और वहाँ माँ से मन्नत भी मांगेंगे  |

देखना, तुम्हारा मन भी शांत हो जायेगा और अपने बिगड़े हुए काम भी बन जायेंगे | अब तुम चिंता करना छोडो और  आराम से सो जाओ |

कभी कभी बहुत समझदारी भरी बातें  करती हो भाग्यवान | तुम ठीक कहती हो चिंता करने से क्या होगा | जब लड़ना ही है तो जीत के बारे में सोचो ..राजेश्वर बोलते हुए अपने कमरे के बिस्तर पर निढाल होकर लेट गए और फिर जल्द ही आँखे लग गई |

सुबह – सुबह तडके उठ कर दूकान जाने को तैयार हो रहे थे, तभी कौशल्या चाय लेकर आयी और पूछने लगी…इतना सवेरे दूकान क्यों जा रहे हो जी ?

अरे , अपना कालू राम कल भी नहीं आया था, इसलिए दूकान की चाभी लेकर मुझे ही जाना होगा | तू जल्दी से नास्ता का इंतज़ाम कर दे ..राजेश्वर समझाते हुए बोला |

ठीक है, बस अभी तैयार करती हूँ …बोलते हुए कौशल्या जल्दी से रसोई में घुस गई |

दुकान में आज कुछ ज्यादा ही भीड़ थी और राजेश्वर अकेला परेशान हो रहा था | तभी उसने देखा कि कालू सामने से चला आ रहा है | उसे देखते ही उसकी जान में जान आ गई | चलो अब दोनों लोग मिल कर इतनी भीड़ को संभाल लेंगे |

प्रणाम सेठ जी …कालू पास आते हुए बोला और मिठाई का पैकेट  राजेश्वर के हाथ में थमाता हुआ उसके पैर छू लिए | और साथ आये अपने बेटे को भी इशारा किया और उसने भी राजेश्वर के पैर छू लिए |

अरे, यह मिठाई किस ख़ुशी में कालू  ?…..राजेश्वर आश्चर्य से उसे देखते हुए पूछा |

मालिक, मेरा  यह बेटा बोर्ड परीक्षा में उतीर्ण हो गया है और इतना ही नहीं,  यह पुरे जिले में टॉप किया है |

पेपर में भी फोटो छपेगा | इसी के चक्कर में मैं कल काम पर नहीं आ सका था |

वाह, यह बहुत बड़ी खुश- खबरी है | यह तो बड़ा होनहार लड़का मालूम पड़ता है | भगवान् इसका भला करे |

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राजेश्वर को  वो पुराने दिन अचानक याद आ गए | जब छोटा भाई दिनेश भी बोर्ड परीक्षा में टॉप किया था, और पुरे गाँव में उसने  मिठाई बंटवाई थी |

और वो आगे इंजीनिरिंग की पढाई के लिए शहर जाना चाहता था | मैं भी उसके साथ शहर गया था और वहाँ रहने – खाने का सारा इंतज़ाम किया  था | नए कपडे, नए जूते और नए किताब, सब कुछ नया नया खरीद कर दिया था |

मेरा भी सीना गर्व से ऊँचा हुआ था | गाँव का पहला इंजिनियर मेरा भाई जो बनने वाला था |

अचानक उसकी तंत्रा टूटी जब कालू ने कहा ..सेठ जी, चाय लाऊँ क्या ?

हाँ  हाँ, ले आओ ..राजेश्वर बोल कर बच्चे की तरफ मुखातिब हुए |

आगे क्या करने का इरादा है, बेटा ?. …राजेश्वर ने  उस बच्चे से पूछा |

अंकल जी,  मैं खूब पढना चाहता हूँ और बड़ा जज बनने की इच्छा है | लेकिन उसके लिए तो शहर जा कर पढाई करनी पड़ेगी |  इस गाँव में तो लॉ कॉलेज है ही नहीं |

वाह, बड़ा नेक विचार है | जिस क्षेत्र में पढाई करने की इच्छा हो वही पढाई करनी चाहिए |

तभी बीच में बात काटते हुए कालू बोल पड़ा …अरे, कहाँ सेठ जी | शहर की पढाई का खर्चा मैं कैसे पूरा कर सकता हूँ |  इसके पढाई लिखाई के लिए  उतने पैसे कहाँ से आएगा ?  घर का खर्चा ही मुश्किल से चला पाता  हूँ |

इसने  इतना पढ़ लिया यह बहुत है | अब पढाई ख़तम, और कही काम पे लगा देंगे | छोटा मोटा काम तो मिल ही जायेगा …कालू इत्मीनान से बोल रहा था |

अरे, ऐसा क्यों भला ..लड़का पढने में तेज़ है, आगे पढाई जारी रखना चाहता है और पढ़ लिख कर बड़ा आदमी बनेगा तो सबसे ज्यादा तुम्हे ही ख़ुशी होगी |

वो सब ठीक है, लेकिन हकीकत आप से छुपी नहीं है | शहर में रह कर पढ़ाने का खर्चा तो आप को भली भांति पता ही है | आपने भी अपने छोटे भाई को तो पढाया था |

सोचिये, आप के ऊपर कितना क़र्ज़ हो गया था | उन्ही सब कारणों से मैंने उस पर विचार करना ही छोड़ दिया है  |

अरे कैसी बातें करते हो ? तुम तो इसे शहर भेजने की तैयारी करो और चाहे जितना पढना चाहे, इसे पढने दो  | तुम ऊपर वाले पर भरोसा रखो,  वो चाहेंगे तो सब ठीक हो जायेगा |

 इसमें मैं भी कुछ तुम्हारी मदद करूँगा, .राजेश्वर  उस बच्चे के सिर पर हाथ रखते हुए बोला |

ठीक है सेठ जी, जब आप इतना हिम्मत दे रहे है तो अब मैं भी अपना इरादा बदल रहा हूँ | अब मैं इसे ज़रूर पढ़ाऊंगा  और समय समय पर आपसे मार्गदर्शन भी लेता रहूँगा यह कह कर सेठ जी के हाथ को लेकर अपने माथे से लगा लिया |  ख़ुशी से उसकी आँखे छलक आयी | 

राजेश्वर दोनों को आशीर्वाद देते हुए अपने मन में कहा … ..इसी तरह कभी वो भी खूब पढना चाहता था लेकिन पैसे के अभाव में उसे बीच में ही पढाई छोडनी पड़ी थी, जिसका आज तक पछतावा है |

मैं इस बच्चे के साथ पैसे के अभाव में ऐसा नहीं होने दूंगा | ऐसा सोच कर ही उसके अंदर एक विशेष प्रकार की संतुष्टि महसूस हो रही थी |

तभी एक डाकिया ढूंढता हुआ राजेश्वर के पास आया और बोला …मैं आप के घर गया था तो वहाँ पता चला कि आप अभी दूकान पर मिलेंगे, इसलिए यहाँ  चला आया |

क्या बात है डाकिया बाबू,  सब खैरियत तो है ना ….राजेश्वर  प्रश्न भरी निगाहों से देखा |

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राजेश्वर बाबु.. ,आप के नाम एक रजिस्ट्री है | शायद वकील का नोटिस है …डाकिया अनुमान लगा रहा था |

उसने रजिस्ट्री खोल कर देखा तो सचमुच वकील का नोटिस था, जो छोटा भाई के तरफ से उसे दिया गया था |

नोटिस को देख कर उसके मन को धक्का लगा और उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसका अपना भाई उसके साथ ऐसा कर सकता है |

उन्हें  चिंतित देख कालू बोला …सेठ जी आप चिंता न करे,  पहले वकील साहब से मिल कर नोटिस को दिखाइए | वो खुद ही उचित सलाह दे देंगे |  मैं तो यहाँ  दूकान पर हूँ ही |

तुम ठीक कहते हो ..  ऐसा बोल कर राजेश्वर तेज़ क़दमों से दूकान से निकल गया |

राम राम वकील साहब….राजेश्वर सामने की कुर्सी पर बैठते हुआ कहा |

आइये राजेश्वर जी, आप कैसे है …वकील साहब उनको देखते हुए पूछा |

कुछ  कुशल मंगल नहीं है, ….राजेश्वर चिंतित मुद्रा में ज़बाब दिया  और रजिस्ट्री वाला नोटिस वकील साहब को दिखाया |

यह तो आप के छोटे भाई का नोटिस है जो अपने वकील के द्वारा भिजवाया है …..वकील साहब  उसको देखते हुए बोले |

अब क्या होगा,  पता नहीं …मेरा तो मन घबरा रहा है ..राजेश्वर वकील साहब को देखते हुए बोल रहा था |

उन्होंने लिखा है कि उसके हिस्से की ज़मीन बेच कर पैसे दे दी जाये ,और अगर आप ने ऐसा नहीं किया तो वो अदालत का दरवाज़ा  खटखटा सकता है .. वकील साहब नोटिस पढ़ते हुए राजेश्वर को समझाया |

लेकिन आप तो बोल रहे थे कि हमलोग को केस नहीं करना चाहिए और उलटे उसने ही हम पर केस करने की धमकी दे रहा है….राजेश्वर वकील साहब की तरफ देखते हुए बोले |

देखिये, अगर वो वकील से नोटिस भिजवाया है तो हमें भी उस नोटिस का  उपयुक्त जबाब बना कर भेजना होगा | फिर देखा जायेगा कि क्या किया जा सकता है …वकील साहब अपना विचार प्रकट कर रहे थे |

अगर वो केस करता है तो हमें तो अपना बचाओ करना ही होगा, इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है ..वकील साहब समझाते बोल रहे थे |

एक विकल्प तो है वकील साहब …राजेश्वर मन ही मन बुदबुदाया |

मैं उसके पास जाऊंगा और उससे बात करूँगा | आखिर छोटा भाई है मेरा | मुझे देखते ही उसका मन ज़रूर पसीज  जाएगा …..(क्रमशः )

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