# आपके है कौन #…20

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आज सुबह जब रामवती की नींद खुली तो मन बड़ा उदास लग रहा था | किचन में जाकर राजू के लिए दूध बना रही थी और  सोच रही थी … रात में सुमन के द्वारा की गई सारी बात उसने ध्यान से सुनी थी और अब पूरी तस्वीर साफ़ हो चुकी है  कि रघु वही है जो उसका  पति है और वो हरिया के साथ ही रहता है |  सुमन भी यही है जिसके बारे में मेरी धारणा थी कि वो जादूगरनी है और उसने मेरे पति को जबरदस्ती फांस रखा है |

लेकिन सुमन को देखने के बाद मेरे विचार पूरी तरह बदल गए है | वो वैसी बिलकुल नहीं लगती है |अब तो इसके प्रति हमारे दिल में इतना प्यार हो गया है कि ,मेरे मुख से कुछ भी ख़राब उसके लिए निकल ही नहीं सकता |

अब सवाल है कि या तो मैं या फिर सुमन ,किसी एक को ही यहाँ जगह मिल सकती है | मुझे सुमन को रास्ते से हटाना होगा या मुझे खुद उसके रास्ते से हट जाना होगा | इसका फैसला मुझे खुद लेना होगा |

अब रिश्ते में तो तुम मेरी शौतन  लगती हो  लेकिन हकीकत में मैं तुम्हे छोटी बहन मान चुकी  हूँ ..रामवती मन ही मन बोल रही थी | तभी सुमन की जोरदार चीख सुनाई दी … |

सभी काम छोड़ कर वो सुमन के पास गई तो देखा सुमन पेट पकड़ कर छटपटा  रही है |

रामवती उसकी ऐसी हालत देख कर  घबरा गई | उसने सुमन को पकड़ कर बोली ..तुम्हे फिर पेट में दर्द शुरू हो गया है क्या ?

हाँ दीदी,  पेट में बहुत दर्द हो रहा है …सुमन बहुत मुश्किल से बोल पा रही थी |

चलो अभी डॉक्टर के पास चलते है,  तुम्हे तो डॉक्टर के पास आज जाना भी था और तुम्हारा जांच रिपोर्ट भी आ चूका होगा ..रामवती घबराते हुए बोली |

तभी सुमन मुश्किल से ड्राईवर का नंबर मिला कर रामवती को देते हुए बोली…लो दीदी,  ड्राईवर को आने के लिए बोल दो |

हाँ – हाँ , अभी तुरंत आने के लिए  बोलती हूँ उसे…सुमन के हाथ से फ़ोन लेते हुए बोली |

तभी देखा कि सुमन बेहोश होकर बिस्तर पर गिर पड़ी | रामवती दौड़ कर पानी लेकर आयी और उसके चेहरे पर पानी के छीटे दिए | कुछ देर में सुमन को होश आ गया , लेकिन दर्द के मारे वो कराह रही थी |

हिम्मत से काम लो सुमन,  अभी कुछ देर में हमलोग डॉक्टर के पास होंगे ..रामवती उसे हिम्मत दिला रही थी |

ड्राईवर का नंबर लग गया और रामवती सुमन की हालत के बारे में उसे बताया और कहा कि आप जल्दी से आ जाइये |

ड्राईवर कुछ ही समय में हाज़िर हो गया और दोनों ने मिलकर किसी तरह सुमन को उसी डॉक्टर के पास लेकर आ  गए | सुमन अभी होश में थी |

सुमन रामवती का हाथ पकड़ कर रखी थी और उसके चेहरे पर दर्द और घबराहट साफ़ दिखाई दे रहे थे |

ड्राईवर दौड़ कर डॉक्टर के पास गया और सुमन की हालत के बारे में बताया | डॉक्टर स्टाफ को स्ट्रेचर लाने को कहा और खुद भी सुमन के पास जाकर उसकी हालत का मुआयना करने लगे |

डॉक्टर साहेब, देखिये ना सुमन को क्या हो गया है …रामवती रोते हुए बोल रही थी |

आप धर्य रखिये, मैं अभी चेक करता हूँ ..डॉक्टर साहेब ने कहा |

तभी सुमन डॉक्टर को देखते हुए बोली…मेरा जांच की रिपोर्ट तो आ गई होगी |

हाँ , आपकी जांच रिपोर्ट को देख लिया है और उसी के बारे में चर्चा करना चाह रहा हूँ | आप अपने घर से किसी को बुला लीजिये |

जो भी है बस हमारी दीदी है …जो भी बात करना है  आप इसके सामने ही करें.|

देखिये आप तो पढ़ी लिखी है, समझदार है | दरअसल बात यह है कि आप की जांच रिपोर्ट से यह पता चल रहा है कि आपका अपेंडिक्स पक कर उससे स्राव हो रहा है ,जिसके कारण आप के पेट में भयंकर पीड़ा हो रही है…..डॉक्टर साहेब ने कहा  |

अभी मुझे जितनी जल्द हो सके ऑपरेशन करके अपेंडिक्स को निकालना होगा |..अगर वह पेट में ही फट गया तो आप की जान को खतरा हो सकता |  अगर कोई आप के अपने हो जो यहाँ के फॉर्मेलिटी को पूरा कर सके और…डॉक्टर की बात पूरी भी नहीं हुई कि सुमन  फिर से बेहोश हो गई |

डॉक्टर साहेब  सुमन को तुरंत एक इंजेक्शन लगा दिया और उसके  होश आने का इंतज़ार करने लगा |

रामवती को सुमन की हालत देखी नहीं जा रही थी . और आँखों से झर झर  आँसू बह रहे थे | समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाये…

तभी उसको रघु की याद आई और उसने सुमन के मोबाइल से रघु नाम को देख कर उसे  फ़ोन लगा दी | वो तो अच्छा हुआ कि सुमन ने उसे लिखना और पढना सिखा दिया था |

उधर फ़ोन की घंटी बजा और रघु  अपने मोबाइल  में नंबर देख कर बोला …हाँ सुमन, बोलो क्या बात है |

मैं रामवती बोल रही हूँ ….रामवती ने जबाब में कहा .|

रघु को अब समझ नहीं आ रहा था कि क्या जबाब दे | अगर वो मुझे पहचान लेगी तो अभी ही बबाल हो जायेगा |

वो फ़ोन पकडे रहा लेकिन कुछ बोल नहीं पा रहा था |

तभी रामवती बोली ..देखो जी, मैं आप को जान गई हूँ और मैं आप की पत्नी बोल रही हूँ, ये आप भी जान रहे हो | लेकिन अभी उन सब बातो के लिए मेरे पास समय नहीं है ….सुमन मैडम हॉस्पिटल में है और डॉक्टर तुरंत ऑपरेशन करने के लिए बोल रहा है,  अगर ऑपरेशन में देर हुआ तो उसके जान को खतरा हो सकता है |

मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है  | तुम जल्दी से चले आओ और सुमन को किसी तरह बचा लो ..बोलते हुए रामवती रोने लगी |

सुमन को तभी होश आ चूका था और वो रामवती की रघु से फ़ोन पर की गई बाते सुन ली |

रघु को यह तो अच्छी तरह समझ आ गया था कि अब रामवती से कुछ भी छिपाना ठीक नहीं है, वो हॉस्पिटल का नाम पूछा और कहा ..तुम घबराओ नहीं ,मैं तुरंत पहुँच रहा हूँ… और उसने बिना एक पल गवाएं हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गया |

डॉक्टर ने रामवती से ही सारे पेपर पर हस्ताक्षर  करा लिए थे,   और ऑपरेशन थिएटर में ले जाने की तैयारी  करने लगे | उसी समय रघु भी दौड़ता हुआ वहाँ पहुँच गया | उस समय सुमन को होश आ चूका था | और वो रघु को देख रही थी, पर मुँह से कुछ बोल नहीं पा रही थीं | उसके आँखों से आँसू बह रहे थे |

इधर रघु भी एक टक उसे देखे जा रहा था ..उसने अपने दोनों हांथो से सुमन के  हाथ  को पकड़ रखा था उसके आँखों से आँसू टपक कर सुमन के हाथो को भिंगो रहे थे | सुमन एक हाथ उठाकर इशारे से रामवती को बुलाई |

रामवती भी उसके हाथ को पकड़ ली और रोने लगी …सुमन  कुछ देर तक दोनों को देखती रही  और फिर उसने रघु के हाथ को रामवती के हाथ में दे दिया | उसे पता चल चूका था कि  रघु रामवती का पति है | और उसे आभास हो चला था कि उसका बचना मुश्किल है |

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तब तक डॉक्टर साहेब भी आ गए और रामवती से बोले कि अभी आप पचास हज़ार रूपये काउंटर पर जमा करा दीजिये |

डॉक्टर की बात सुन कर रामवती रघु की ओर देख कर बोली…इतने पैसो का अभी कैसे इन्तेजाम हो सकता है |

तभी रघु को सेठ जी का ख्याल आया और उनको फ़ोन लगा दिया |

हेल्लो सर, मैं रघु बोल रहा हूँ | यहाँ सुमन मैडम को अपोलो हॉस्पिटल से लेकर आया हूँ और डॉक्टर अभी तुरंत ऑपरेशन करने को बोल रहे है …रघु  घबरा कर सेठ जी को कहा |

अच्छा ठीक है , आप डॉक्टर से मेरी बात कराओ….सेठ जी ने रघु को कहा |

रघु जल्दी से डॉक्टर को फ़ोन देकर कहा …कृपया मेरे सेठ जी से बात कर लीजिये |

हेल्लो , मैं मांगी लाल अग्रवाल , धारावी इंडस्ट्री का मालिक बोल रहा हूँ …सेठजी ने कहा |

आप को कौन नहीं जनता है….डॉक्टर उनकी आवाज़ सुनकर जबाब में कहा |

मैं बस आधे घंटे में पहुँच रहा हूँ, आप पैसो की फिक्र ना करे, आकर सारा पेमेंट कर दूंगा |

आप ऑपरेशन की तैयारी  करें…..सेठ जी जल्दीबाजी में डॉक्टर से निवेदन किया |..

तभी हरिया और विकास भी पहुँच गया | और मैडम को देख कर बोला …मैडम आप बिलकुल चिंता नहीं कीजिये , आप बहुत जल्दी ठीक हो जायेंगे | सुमन उन दोनों को देखा और अपना  दर्द छिपा कर मुस्कुरा दी |

रामवती राजू को हरिया को थमाते हुए बोली ..इसे अभी अपने पास रखो |और जाते वक़्त अपने साथ लेते जाना |

नहीं रामवती , तुम भी घर चली जाओ | मैं यहाँ सब संभाल लूँगा …रघु रामवती को समझा रहा था |

मैं सुमन को एक पल के लिए भी नहीं छोड़ सकती ,अगर इसे कुछ हो गया तो मेरा भी जीवन व्यर्थ हो जायेगा |

इसी बीच डॉक्टर साहेब आये और रघु की तरफ मुखातिब होकर बोला…अभी इनकी हालत बहुत बिगड़ चुकी है, कुछ कहा नहीं जा सकता है कि इन्हें बचा पाउँगा या नहीं | अपेंडिक्स के फट जाने से अंदर जहर फ़ैल चूका है |

ऐसा मत कहिये डॉक्टर साहेब  इसे हर हाल में बचाना होगा ….रामवती रोते हुए बोल  रही थी … (क्रमशः )

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