हँसना मना है ..2

आज सारी रात परेशानी में गुजर रही थी, दिन की घटना के बाद हमलोग चारों दोस्त मेरे यहाँ ही रुक गए

रात  भर planning चलती रही…मकान मालिक का agent जो यहाँ है, कल ही मकान  खाली करने को ज़रूर कहेगा | अब समस्या थी कि दूसरा  मकान देगा कौन ? ..बदनामी बड़ी ख़राब चीज़ होती है |

फिर कुछ सोच कर राजेश अपने दिमाग पर जोर देकर बताया कि शायद, भैरों सिंह जी का एक छोटा सा मकान है यहाँ, जो कृषि  उपज मंडी के पास है और वो शायद खाली भी है | उसके लिए  कोशिश की जाए, वैसे भी वो लोग शिवगंज में नहीं रहते है, पास के गाँव खिवान्दी में उनकी अच्छी खेती है और वो लोग वही रहते है |

तय हुआ कि सुबह सुबह गाँव खिवान्दी जाया जाए और रमेश भी साथ होगा |  किसी तरह रात बीती, हालाँकि  दुसरे दिन Sunday थी इसलिए बैंक जाने की चिंता नहीं थी, लेकिन Sunday को जो आराम और मनोरंजन का कार्यक्रम चलता था वो इस चिंता के कारण जाता रहेगा |

ठीक आठ बजे सुबह मैं और राजेश उसी की मोटर साइकिल पर बैठ, गाँव खिवान्दी की ओर रवाना हो गए और करीब आधे घंटे के बाद  भैरों सिंह के Farm House में पहुँच गए | भैरों सिंह जी अपने इस फार्म हाउस में ही खेतो में काम करते मिल गए,  शायद गेहूं में पानी पटाया जा रहा था | सुबह  का समय और  चारो तरफ हरियाली  की छटा, बहुत ही मन भावन  दृश्य लग रहा था, मेरी इच्छा हुई कि इसी गाँव में ही अपना ठिकाना बना ले |

लेकिन जैसे ही कल की घटना की याद आयी कि तुरंत ही हम original mood में आ गए .. भैरों सिंह हमारे चेहरे की परेशानी शायद पढ़ लिए थे | वे बड़ा ही नेक इंसान लगे ..उनकी राजेश से पुरानी जान पहचान थी शायद, बिजली विभाग में काम करने वाला राजेश, कोई ना कोई काम तो किसानों  को पड़ते ही रहता होगा ,,

खैर, सिंह साहेब अपने खेतों के काम छोड़ कर हमलोगों के पास आए और एक चारपाई डाल दी और बैठने का इशारा किया | हमलोग बैठे ही थे कि दो लोटे में तुरंत का निकाला  हुआ गाय का दूध लेकर आए और पीने  का आग्रह करने लगे .

.मैं भला शहर का छोरा, चाय पीने  की आदत थी और यहाँ गाँव में उसकी जगह सुबह में दूध दिया जा  रहा था | लेकिन, हमें उनसे अभी मतलब की बात करनी थी इसलिए उनका मन रखने के लिए लोटे को मुँह  से लगाया और गटक लिया..लेकिन सच कहूँ तो इतना स्वादिस्ट और बिना चीनी के इतना मीठा दूध कभी नहीं पिया था ..सचमुच मज़ा आ गया |

 अब हम और समय को जाया नहीं करते हुए direct मुद्दे पर आ गए….मुझे पता चला है कि आप का एक मकान शिवगंज में है और वो खाली है ?.. उन्होंने हमारी परेशानी को समझते हुए बोल पड़े  ..अरे, शिवगंज  में तो घने (बहुत) मकान खाली है ..किन साहेब को मकान चाहिए, मैं जैन बंधू से बोल कर दिला दूँगा |

मैं बीच में ही बात काट कर ..कल की सारी घटना बता दी ..उस साले गली के कुत्ते ने अपनी पार्टी तो कर ली परन्तु मेरे पार्टी की ऐसी की तैसी कर दी |

यह सुनकर वो हँसते हुए बोले ..ये मारवारी भी ऐसे ही होते है….मैं क्या खाता हूँ.. क्या नहीं, उससे उनको  क्या मतलब | लेकिन यह  सच है कि एक ने मना  किया तो कोई भी मकान नहीं देता |

मेरी तो एक छोटी सी मकान है और खाली भी है ..लेकिन एक समस्या है ..मैं उनकी ओर आशंका भरी नजरो से देखा | उन्होंने आगे कहा कि उस मकान में “शौचालय” नहीं है ..बाकी सारी सुख सुविधा है, लेकिन शौच के लिए आप को वहाँ पास के खेतों में जाना पड़ेगा | वैसे, वहाँ बहुत लोग खेतों में ही जाते है,

मैं बड़ा असमंजस में पड़ गया कि बिना शौचालय वाला मकान में कैसे shift किया जाए | अगर रात को ज़रूरी हुई तब क्या होगा, इन्ही बातों में उलझा हम दोनो वापस  आ रहे थे कि राजेश ने कहा कि अभी फिलहाल तो shift कर लिया जाए फिर बाद में देखा जायेगा | दुसरे दिन पुराने मकान का in charge ने दो दिनों का ultimatum दे डाला और हम भी दुसरे दिन ही धड़कते दिलों से  प्रभु का नाम लेकर shift हो गए |

नयी जगह होने से रात को नींद भी ठीक से नहीं आयी, और सुबह जल्दी ही उठना पड़ा ..क्योकि शौच के लिए भोर में ही खेत में जाना होगा ताकि कोई देख ना ले …मैं हाथ में लोटा लिए मुँह  पर गमछा रख कर चल पड़ा खेत की ओर..

शिवगंज छोटी जगह होने के कारण सभी लोग जानते थे, सो इतनी सुबह भी बहुत सारे जान पह्चान वाले लोग मिलने लगे ..और मेरे हाथ में लोटा देख कर आश्चर्य से मेरी और देखा और आँखे मिलते ही प्रणाम पाती भी करने लगे | मैं किसी तरह उन सब लोगो से बचता हुआ तेज़ी से आगे निकलना चाहता था क्यों कि ……….अब आगे क्या कहूँ || खैर, खेत में किसी तरह निपट लिए /

मैं जब बैंक शाखा पहुँचा तो हमारे चाहने वालों ने आश्चर्य से पूछा कि आप भैरों सिंह के मकान में चले गए ? और सुना है कि उसमे शौचालय भी नहीं है …मैं ने हाँ में सिर हिलाया तो वो लोग हँसते हुए मजाक में कहा कि.. पता है ? ..खेतों में बिच्छू भी मिलते है, जरा संभल कर ……||

मैं उनकी बातें समझ गया, मुझे यह भी पता था कि इन खेतों में राजस्थानी साँप भी मिलते है | मैं काफी परेशान हो गया और बैंक का काम समाप्त कर शाम में सीधा राजेश के घर गया और अपने आशंकाओ से उसे अवगत कराया ..मैं तो साफ़ साफ़ उसे बता दिया कि इस घर में रहना मेरे लिए संभव नहीं है |… फिर उसने जो बोला…खैर , आगे कि बात आगे की blog में…

इससेआगे की घटना के लिए नीचे दिए link पर click करें …..

https://retiredkalam.com/2020/05/11/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%b8%e0%a5%82/

दिल को जब भी उदास पाता  हूँ

आँखे बंद कर निचोड़  लेता हूँ

उन सारे बिताये  लम्हों को

जो भींगे है आज तक तेरी यादों में

बूंद बूंद  टपकती  वो मधुर लम्हे

मीठे सपनो की दुनिया में खो जाता हूँ…

BE HAPPY… BE ACTIVE … BE FOCUSED ….. BE ALIVE,,

If you enjoyed this post don’t forget to like, follow, share and comments.

Please follow my blog on social media and visit….

http://www.retiredkalam.con

4 thoughts on “हँसना मना है ..2

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s