करोना की दुहाई

 

अब  lockdown का तीसरा चरण की शुरुवात हो चूका है पहला चरण (24 march to 14april) २१ दिनों की दूसरा चरण (15 April to 3rd  may) 17 दिन और  तीसरा चरण (4th may to 17th may) 14 दिनों की |

अब हिम्मत तो पस्त  होना लाज़मी था ..हर पल संकट और  डर  के साए में जीना, ख़ास कर हम जैसे बुड्ढा  के  लिए ..लेकिन कहते है ना कि अच्छी सोच, अच्छा विचार और  अच्छी भावना मन को हल्का करती है ,,हँसते रहिये हंसाते  रहिये और  सदा मुस्कुराते रहिये…

ज़िन्दगी की  छोटी छोटी परेशानी से हम बहुत जल्द घबरा जाते है ..परन्तु ज़िन्दगी में challenge ना हो तो जीने का मजा ही क्या ..विपरीत परिस्थिति में धर्य खोना नहीं चाहिए…

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मैंने एक कहानी सुनी थी कि …

एक समय  की बात है कि एक गिद्धों का झुण्ड उड़ता हुआ एक टापू पर जा पहुँचा जो चारो तरफ समुद्र से घिरा हुआ था | समुद्र के बीचो बीच इस टापू पर उनके खाने के बहुत सारी  चीजें थी… मछलियाँ थी, मेढक थे, ढेर सारे  समुद्री  जीव – जंतु थे |

और  यह सब बिना परिश्रम के उपलब्ध  थे | गिद्धों को ऐसी जगह देख कर मज़ा आ गया | जो युवा गीद्ध थे वो बोले कि यहाँ तो बिना मिहनत किए ही इतने सारे खाने की चीज़ उपलब्ध है | अब तो पूरी ज़िन्दगी हमलोग यही रहेंगे और  अब कहीं और  जाने की ज़रुरत नहीं है |

और  सबसे कमाल की बात थी कि इन गिध्धो का शिकार करने वाला कोई जानवर भी नहीं था | बिलकुल सुरक्षित  स्थान और  भोजन भी भरपूर | ज़िन्दगी आराम से चलने लगा |

लेकिन कुछ दिन बीतने के बाद इन सब के मुखिया, जो वृद्ध गीद्ध थे  उसे चिंता होने लगी | उसे लगा कि यहाँ रह कर हमलोग आलसी बन जाएंगे ,और  शिकार करना  और  मुसीबत का सामना करना ही भूल जाएंगे |

यहाँ ज़िन्दगी में कोई challenge का सामना नहीं करना पड़ रहा है ,struggle नहीं कर रहे है | हमने तो अपने ज़िन्दगी में इतने दुःख देखे है कितने challenge  का सामना करते थे | ये नए गीद्ध तो ऐसा कुछ नहीं कर पा रहे है | ये क्या ज़िन्दगी का असली मतलब समझ पाएंगे ? क्या यह सब लोग मुसीबत आएगी तो उसका सामना करने का हौसला रख पाएंगे ?

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ऐसा सोच कर वो बुढा गीद्ध सभी को बुलाया और  अपने मन की बात रखी ……चूँकि वो सबसे senior था इसलिए सभी उसकी बात को  ध्यान से सुन रहे थे | उसने  आगे कहा कि इस टापू पर सब कुछ सही चल रहा है, लेकिन कोई मुसीबत नहीं आ रही है और  ना कोई challenge का ही सामना करना पर रहा है |

मुसीबत का कैसे सामना करना है यह सिखने को नहीं मिल रहा है | इसलिए हमलोग वापस उसी पुरानी जंगल में चलते है , वहाँ अपने जो basic skill है उसका उपयोग होता रहता है यहाँ यह हाल रहा तो उड़ना तक भूल जाएंगे |

इस पर कुछ  जवान गीद्ध लोग भड़क गए और  कहा कि लगता है आप बढती उम्र के साथ सठिया गए है .. इतनी आराम की ज़िन्दगी है ,इसे छोड़ कर रोज रोज नई  मुसीबतों के साथ जीना क्यों चाहते है | तो बूढ़े गीद्ध ने कहा कि मैं सिर्फ इतना बोलना चाहता हूँ ..यहाँ रहने से कुछ लोग उड़ना तक भूल गए  है क्यों कि यहाँ किसी भी skill की नुमाइश की ज़रुरत नहीं पड़ती है.

इसीलिए मैं तो यहाँ से जा रहा हूँ अगर कोई मेरे साथ चलना चाहता है तो चले | लेकिन सिर्फ दो चार दोस्त ही उसके साथ उड़ान भरी | और  पुराने जंगल में पहुँच गया ..जहाँ पहले रहा करते थे | बाकि के सारे गीद्ध  इसी टापू पर रह गए |

कुछ दिन बीतने के बाद ,उस बूढ़े गीद्ध  को लगा कि चलो अपने पुराने साथियों के पास जाकर उनका हाल चाल जान लिया जाए | वो कुछ साथियों के साथ उड़ता हुआ उस टापू पर पहुँचे तो उसने देखा कि वहाँ की स्थिति बिलकुल बदल चुकी थी | वहाँ ढेर सारे गिद्धों  की लाश पड़ी थी |

कुछ घायल गीद्ध  दर्द से कराहते हुए मिले | बुढा गीद्ध  उनमे से एक के पहुँचा और  ऐसी स्थिति का कारण पूछा तो  घायल गीद्ध ने बताया कि आप सही कह रहे थे / हमने मुसीबत का सामना कैसे करना है, भूल चुके थे और यहाँ तक कि.. उड़ना भी |

यहाँ पर कुछ दिन पहले एक जहाज़ आया और  उसमे से कुछ चीते छोड़े गए, पहले तो चीते हम पर हमला नहीं करते थे  लेकिन बाद में जब उसे मालूम चला कि हम तो उड़ भी नहीं सकते, हम उड़ना भूल गए है, हमारे पंजे  भी उस तरह develop नहीं हो सके कि हम किसी पर attack कर सके /

तब उन चीतों ने हम पर हमला करना शुरू  किया और  एक एक कर सभी गिद्धों को खाना शुरू किया | हमलोग कुछ लोग इस  टापू पर फिलहाल बचे है |

यह छोटी से कहानी हमें ज़िन्दगी में बहुत बड़ी बात सिखाती है | अगर हम comfort zone में चल्र गए तो वहाँ से बाहर आ पाना मुश्किल हो पाता  है | जब आप को  इस बात का आभास होगा तब तक देर हो चुकी होगी |

इसलिए  अपने को comfort zone से बाहर निकालिए और  हर पल मुसीबतों का सामना करने को तैयार रहना चाहिए और  हर challenge को स्वीकार  कर उससे पार पाना चाहिए | जब तक चुनौती का सामना करते  रहेंगे  हम आगे बढ़ते रहेंगे,,,तो एक दिन करोना से भी पार पा लेंगे ..

न कुछ तोड़ना था, न बिखराना  था

उलझी ज़िन्दगी को, बस सुलझना था

हमने तो यारो बस, कसम खाई थी

खुद हँसना था और औरों को हँसना था

आज ये कौन सी  आफत आई

लोग दे रहे “करोना” की  दुहाई

चारो तरफ मची है खलबली

हजारो ज़िन्दगी मौत में है समाई

हम हँसना और  हँसाना भूल गए

अपनों को गले लगाना भूल गए

जिनके दीदार को रहते थे आतुर

उन्ही से नज़रे मिलाना भूल गए

पर मुझे है ज़िन्दगी पर भरोसा

ये दुखो की  रात भी कट जाएगी

कल सुबह होगी सूरज निकलेगा

और मुस्कुराहटों से बंदिस भी हट जाएगी….

BE HAPPY… BE ACTIVE … BE FOCUSED ….. BE ALIVE,,

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