मैं ज़िन्दगी हूँ

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स्पेन में रहने वाले जुलिओ जिसका जनम 23rd sept,1943 को हुआ था | उसका सपना था   एक अच्छा फुटबॉल प्लेयर बनने का  और अपना favourite फुटबॉल क्लब रियल मेड्रिड से खेलना | और उसके लिए वह बहुत रात दिन प्रयास करता रहा, काफी प्रैक्टिस भी करता था |

सिर्फ  बीस साल का होते होते वह एक अच्छा goal keeper बन गया | और सबसे बड़ी ख़ुशी की  बात थी कि उसका उस favourite क्लब से करार भी हो गया | अब वह इस क्लब के लिए खेल सकता था | वह अपने को खुशनसीब इंसान समझने लगा था क्योंकि उसका सपना सच हो गया था |

अब उसका सपना था कि वह स्पेन का no.1 goal keeper  बनेगा | उसका खेल इतना अच्छा था कि सभी  लोगों को यकीन हो गया कि यह एक दिन no.1 कीपर बन ही जायेगा |  परन्तु हम तो वक़्त के हाथो मजबूर है |

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एक दिन की  बात है कि जब वह अपने दोस्तों के साथ घुमने निकला था तो उसका भयंकर  कार एक्सीडेंट हो गया और उसके शरीर  में बहुत सारे फ्रैक्चर | इतना ही नहीं, कमर से निचे का पुरे हिस्से में paralysis हो गया |

उसके आँखों के सामने फुटबॉलर बनने का सपना जैसे चकनाचूर होता दिखाई दे रहा था | डॉक्टर तो इतना तक कह दिया कि फुटबॉल खेलना तो दूर अब यह ठीक से चल पायेगा या नहीं, इसमें संदेह है |

 अपनी ऐसी हालत पर उसे बहुत दुःख हो रहा था, और अफ़सोस भी हो रहा था कि उस शाम वो अपने घर से निकला ही क्यूँ | परन्तु होनी को कौन टाल  सकता है |

इस दर्द भरे सफ़र की .. जो शुरुआत हो चुकी थी, इसे थोडा आसान बनाने के लिए वो बिस्तर पर बैठे बैठे गाने लिखना शुरू किया और उसे अपने गिटार की  मदद से गाने की  practice करने लगा | वह बिस्तर पर बैठा बैठा गाना गाता ,गिटार बजाता ताकि उसके जीवन की  दर्द कुछ कम किया जा सके |

अपने इस एक्सीडेंट के पाँच साल के बाद वो अपने को समझा चूका था कि अब वो फूटबाल  नहीं खेल पायेगा तो क्या हुआ, उसे जो अभी opportunity है उसी में सफलता पाने की  कोशिश करेगा |

और तब उसने एक दिन  एक singing competition में भाग ही नहीं लिया अपितु उसका favourite गाना life must goes on ..गाया  और फर्स्ट प्राइज भी जीता | Julio Igelesias… तब से उसका नाम बड़े सिंगर में सुमार हो गया |

आज वो फेमस सिंगर बन गया शायद फुटबॉलर  होने से जो ख्याति प्राप्त होता ,आज उससे भी ज्यादा ख्याति और पैसा है | यह कहानी बस एक ही बात सिखाता हैं आप जैसा सोचते है life वैसे नहीं चलती, वो तो  अपने हिसाब से ही चलती है |

इसीलिए अपनी ये कोशिश होनी चाहिए कि चाहे परिस्थिति कुछ भी रहे, उसमे best option का इस्तेमाल करे और अपनी उसी तकलीफ को ताकत बना कर सफलता की  सीधी चढ़े …क्योंकि चलते रहना ही ज़िन्दगी है… रुकना है मौत की  निशानी ….

मैं ज़िन्दगी हूँ

 मैं खुशनुमा हूँ, मैं बदनुमा हूँ,

मैं एक चोट हूँ, महसूस कराता हूँ

मुझमें बहुत दाग है, पर वो अच्छे हैं

इन्हें छुपाने के नुस्खे ना बताओ यारों..

मैं इसे ना छुपाता हूँ, ना दिखाता हूँ

मैं बस यही बतलाता हूँ..

ये ज़िन्दगी खुशनुमा भी है,

ये ज़िन्दगी बदनुमा भी है

इसे मिटाने की नही, निभाने की ज़रूरत है…

मैं तो ज़िन्दगी हूँ. …. मैं तुम्हारी हूँ..

                     ...विजय वर्मा …

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