# सोच बदलें ..जीवन बदलें #

जीवन में सबसे बड़ा अनुशाशन है समय का सदुपयोग | हमलोग व्यर्थ की कामों में समय को गवां देते है और समय निकल जाने पर सिर्फ पछतावा होता है |

हमारा समय बहुत कीमती  और सिमित resource है, इसलिए इसे समझदारी से खर्च करना चाहिए   |  किस काम में कितना समय इन्वेस्ट करते है, इसका नफ़ा या नुकसान आने वाले समय में पता चलता है | आइये,  आज इसी पर आज चर्चा करते है — ..

यह सही है कि आज  हम समय का जैसा उपयोग करेंगे आने वाले दिनों में वैसा ही परिणाम प्राप्त होगा | लोग कहते हो कि धन चला जाये तो फिर दुबारा प्राप्त किया जा सकता है लेकिन जो समय एक बार चला जाता है उसे वापस प्राप्त नहीं किया जा सकता है |

इसलिए समय का सदुपयोग करना सीखे | कई लोग  निरर्थक चीज को अधिक महत्वा दे देते है और यही उनकी असफलता का कारण बनता है | जो सफल व्यक्ति होते है वो जानते है कि  जीवन में किस चीज़ का कितना महत्व है | उनको यह भी पता है कि बाहर से सफल बनना है तो पहले अंदर से सफल बनना होगा | यानी अपने मन को control करना सीखना होगा |

हम जो भी फैसला (decision) लेते है, यह हमारे values, यानि  उसूल  पर निर्भर करता है | आप अपने जीवन में किस चीज़ को कितना महत्व देते है उसी से आप का value बनता है | जैसे हम सत्य को, या दुसरो की सेवा को ज्यादा महत्व देते है, या खुद की इच्छा पूर्ति को महत्व देते है, वही हमारा वैल्यू बनाता है /  इस को चरितार्थ करती एक छोटी परन्तु विचारणीय कहानी …

एक विधवा जो अपनी एक 16 साल की बेटी के साथ समुद्र तट पर झोपडी में रहती थी | वो गरीबी में जीवन यापन कर रही थी | दुर्भाग्य की बात थी कि वो विधवा अंधी थी और बेटी अनपढ़ थी | लेकिन उसकी बेटी समुद्र में गोता लगाने में माहिर थी, और समुद्र से  मोती और सोने जवाहरात आदि निकाल लाती थी | उसे बेच कर घर का खर्च चलता था | वो कुछ मोतियाँ बचाकर एक घड़े में जमा भी करती थी |

एक दिन की बात है कि उसकी बेटी घर से गई तो रात तक वापस ही नहीं आयी | वो विधवा माँ चिंता में दो दिनों तक बेटी की राह देखती रही, फिर भी बेटी वापस नहीं आयी | तो उसे इस बात की आशंका हुई कि बेटी समुद्र में डुबकी लगाते हुए समुद्र में डूब गई होगी |

अब वो अंधी विधवा पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा था |, घर में जो  पैसे बचे थे उससे कुछ दिनों तक तो गुज़ारा हुआ | लेकिन आगे क्या करे ? इसी चिंता में थी कि उसे याद आया कि उसकी बेटी कुछ मोती घर में रखे घड़ा में जमा करती थी |

उसने वो घड़ा लिया और किसी तरह वह पास के एक जौहरी के दूकान पर पहुँची और हाथ जोड़ कर जौहरी से विनती कर बोली — मैं बहुत मुसीबत में हूँ, हमारे पास खाने को कुछ भी नहीं है | मेरी बेटी द्वारा जमा की गई कुछ मोतियाँ इस घड़े में है | पता नहीं इसका मूल्य क्या होगा ?, परन्तु इसे खरीद कर आप मुझे कम से कम २०,००० रूपये दे देंगे तो बड़ी कृपा होगी | मैं कुछ दिन और जिंदा रह पाऊँगी |

उस जौहरी ने जब उन मोतियों को देखा तो अवाक रह गया | उसने उस बूढी विधवा से बोला –..माता जी इसे खरीदने के लिए मेरे पास पर्याप्त धन ही नहीं है | लेकिन, ऐसा करता हूँ कि एक सप्ताह के खाने पिने हेतु आपको २००० रूपये दे देता हूँ | तब तक, हम दुसरे जौहरी से संपर्क  करेगें, और तब  इसका उचित कीमत दे पाएंगे |

वो बुढिया खुशी खुशी २००० रुपया लेकर चली गई अब जौहरी दुसरे जौहरी को contact किया और कहा कि इन मोतियों से हमलोग अच्छी कमाई  तो कर सकते है लेकिन इसे उस अंधी बुढिया से खरीदने के लिए पांच करोड़ का फण्ड इकठ्ठा करना पड़ेगा | क्या तुम सब लोग तैयार हो ?

दुसरे जौहरी ने कहा — तुम तो निरीह बेवकूफ निकले | .तुम तो बोल रहे हो कि वो बुढिया अंधी है, वो देख नहीं सकती है | और वो कह भी रही थी कि तुम बीस हज़ार में खरीद लो |

तुम बीस हज़ार देकर मामला रफा दफा कर दिया होता | यहाँ तुम उसका मूल्यांकन कर कहते हो पाँच करोड़ इकठ्ठा करो | जब वो अंधी थी तो उसे क्या पता चलता ?  

इस पर उस जौहरी ने  बहुत सुंदर जबाब दिया |  उसने कहा — वो तो अंधी थी लेकिन मेरी अंतरात्मा अंधी नहीं थी |  वो बुढिया नहीं जान पाती, मगर मेरी चेतना जान लेती  |   यहाँ उस जौहरी ने अपने वैल्यू के आधार पर निर्णय लिया |

यह सत्य है कि हमारे द्वारा लिया गया निर्णय हमारे वैल्यू पर निर्भर करते है | अपनी  वैल्यू बनाने में बहुत सारे  लोग और परिस्थितियां का योगदान होता है | हम हमारे ज़िन्दगी में धन ,सामाजिक प्रतिष्ठा को कितना महत्व देते है, professional career को कितना महत्व देते है, सामाजिक कार्यों में और लोगों को कितना महत्व देते है, यही सब मिल कर हमारी वैल्यू बनती है |

लोग कहते है कि कभी अपनी वैल्यू का मुल्यांकन करना हो तो कभी अपनी आँखों के आँसू गिरा कर देखो, कि कितने हाथ आप की ओर उसे पोछने के लिए बढ़ते है , वही आप की वैल्यू है |

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Categories: motivational

3 replies

  1. Nice story on values

    Liked by 1 person

  2. yes dear ..thank you for your support..

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  3. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Luck is not in your hands, but decision is in your hand.
    Your decision can make luck, but luck can not make your decision.
    So always trust yourself….

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