manage your Overthinking

आज कल हमलोग day to day life में इतने परेशान रहते है कि हमारा दिमाग हर समय किसी न किसी बात में उलझा रहता है और  दिमाग में हमेशा कोई ना कोई विचार लगातार आते ही रहते है / चाहे आप अकेले हो  या लोगों के बीच है / यहाँ तक कि driving  कर रहे होते है तो भी  दिमाग कुछ  ना  कुछ  सोचते रहता है / अतः हम कह सकते है कि unwanted विचारों का लगातार मेरे दिमाग में चलते रहना  ही    overthinking  कहलाता  है / इस समस्या के  ज्यादातर लोग शिकार हो रहे है और इसके कारण तरह तरह की  मानसिक एवं शारीरिक बिमारियों  से जूझ रहे है / इस overthinking की  वजह से लोगो को stress, tension, anxiety  सम्बन्धी बीमारियाँ हो रही है / इतना ही नहीं, कभी कभी insomnia और Parkinson  जैसी घातक बीमारी के शिकार भी हो जाते है / लोगों के जीवन से  happiness  गायब हो रही है / यूँ कहें कि overthinking is a life destroyer.,क्योंकि यह हमारे ज़िन्दगी को तबाह कर रहा है/  

सामान्तः overthinking  के तीन प्रकार होते  है …

Constructive overthinking: Destructive overthinking and vague overthinking..

Constructive  overthinking:

  यह चाह कर और जान बुझ कर की  जाने वाली overthinking है / जैसे हम किसी जटिल  समस्या का समाधान मन ही मन में ढूंढते रहते है / हमेशा दिमाग उसी में उलझा रहता है /और यह positive और constructive thought  को जन्म देता है /

Destructive overthinking:

 यह  constructive thinking  के  उलट overthinking है पर  यह भी जान बुझ कर और deliberately किया गया overthinking है / इसके कारण हम हमेशा negative thought से घिरे रहते है /  यह गुस्सा ,एंग्जायटी और डिप्रेशन को जन्म देती है / ज़िन्दगी नीरस लगने लगती है कभी कभी सुसाइडल tendency के शिकार भी हो जाते है / यह most dangerous स्टेज होती है /

Vague  overthinking:

यह ना तो negative thinking है ,ना positive thinking , पर अनजाने में किया जाने वाला overthinking है. कही के विचार कही भी जुड़ते रहते है जिसको कहते है बिना सिर पैर की  बातें दिमाग में चलना / कारण मन कही और ध्यान कही और / आपस में कोई ताल मेल  नहीं ,तो ख़ुशी कहाँ से आएगी / हम किसी काम में सफल नहीं हो पाते है क्यूंकि हमारे दिमाग में इस तरह के thought  लगातार चलते रहते है है और हम present moments  को महसूस कर ही नहीं पाते है ,क्योंकि मेरे अंदर लगातार या तो past से जुड़े विचार या hypothetical विचार चलते रहते है /

लेकिन इससे कैसे छुटकारा पाया जाए यह एक चैलेंज है ..

  • गहरी साँस ले :  Deep Breathing  की  practice  करनी  चाहिए / जब भी दिन में जीतना भी समय मिलता है, Deep Breathing   करने की आदत डालें /
  • वर्तमान में जिएं : हमेशा present moment को enjoy  करना चाहिए / जब भी उलटे सीधे विचार मन में आए तो हमें देखना शुरू कर दें कि ये विचार कहाँ से आ रहे है ,तुरंत उसकी  जड की  तलाश करनी चाहिए,अगर इस तरह प्रैक्टिस करेंगे तो फालतू विचार आने बंद हो जाएंगे /
  • Brain detox : हमारे दिमाग में बहुत सी  फालतू  बातें कचरे की तरह जमा हो कर  सड़ते रहते है / उन फालतू जमा कचरे को दिमाग से खाली करना होगा और सिर्फ वर्तमान समय पर ही focus  करना होगा / सबसे  अच्छा तरीका है कि आप पर्सनल डायरी रखे और इस तरह के जन्मे विचारों को लिख कर दिमाग से ट्रान्सफर कर दें / इस प्रैक्टिस को करने से psychologically  बडा relief  महसूस करेंगे /
  • खुशियों  की  तलाश करें : हमें  हमेशा अपने को present moment  में  रहने  की कोशिश करनी चाहिए,.. और जो भी छोटी छोटी खुशियों के पल हो उसको महसूस करें उसे एन्जॉय करें / दूसरा उपाय,  वह  काम करे , जिसमे आप का passion  हो,  उसमे ज्यादा समय बिताएं,  आपका जो भी  hobby या passion  है उस पर deep  work  करें,  बस उसमे खो जाएँ ओर ज्यादा समय दें /और तीसरी बात law  of gratitude  को अपनाना / भगवान का सदा शुक्रिया अदा करे जिन्होंने हमें एक अच्छी ज़िन्दगी दी है /
  • सकारात्मक सोच के लिए समय :  दिन में कुछ ऐसे पल निकालें कि उस समय शांत होकर बैठे और पुरे दिन का अवलोकन करें कि कितना समुचित हमारा दिन गुजरा और कल का दिन अच्छा गुजरे उसका प्लान कैसे करना है , हमें  एक  रूटीन फॉलो करना चाहिए / जिस तरह शारीर को सुंदर दिखाने के लिए बहरी सजावट करते है उसी तरह अपने अंदर की  खूबसूरती, अपने विचारों को , अपनी एबिलिटी को  भी निखारना चाहिए/

शायद मेरी बात काफी लम्बी हो गई, लेकिन मैं चाहता हूँ कि आप अपने को reinvent करे और अगर  ऐसी  समस्या का सामना कर रहे है तो इससे निजाद पायें / अगर ऐसा हुआ तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी क्योकि मैंने किसी को एक ख़ुशी का तोहफा तो दिया…

BE HAPPY… BE ACTIVE … BE FOCUSED ….. BE ALIVE,,

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

4 thoughts on “manage your Overthinking

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