# माँ की ममता #

लोग कहते है कि माँ के चरणों में जन्नत होती  है,, क्योंकि वो माँ ना जाने कितना दुःख सह कर, अपने सारे शौक मौज को त्याग कर अपने बच्चो को पालती है |

जब वही बच्चा उस माँ की इज्जत ना करे और चार दिन  की  ब्याही अपनी बीबी को ही सब कुछ समझे ,तो उस माँ पर क्या बीतती है, यह कोई माँ ही बता सकती है |

लेकिन इससे भी बड़ी विडंबना तब होती है जब वही बेटा अपनी माँ से नफरत भी करने लगे तो उस माँ का क्या होगा ? ऐसी ही एक कहानी है एक माँ की..,,नाम था  बिमला देवी |

उसकी एक आँख नहीं थी | उसका पति बहुत पहले गुजर गया था, जब उसका बेटा  रतन सिर्फ एक साल का गोद में ही था | वह रात दिन मिहनत करके, लोगों के घरों में काम करके, अपने बेटे को पढा रही थी, ताकि वो एक अच्छा इंसान बन सके और उसके बुढ़ापे का सहारा भी |

लेकिन जब वो स्कूल जाने लगा और माँ उसे स्कूल छोड़ने जाया करती तो बच्चे रतन का मजाक उड़ाते थे , क्योंकि उसकी माँ एक आँख से कानी थी |

कुछ दिन तो यूँ चलता रहा | पर. एक दिन रतन ने माँ को बोल ही दिया.–. माँ , तुम मेरे साथ स्कूल मत आया करो और हो सके तो तुम मुझसे ही दूर रहा करो | बच्चे तुम्हे मेरे साथ देख कर मेरा मजाक उड़ाते है |

माँ ने उसकी बातो को यह सोच कर हँसी में उड़ा दी थी कि  रतन अभी बच्चा है | लेकिन रतन कुछ बड़ा हुआ  तो फॅमिली फंक्शन हो या बर्थडे पार्टी हो या कही भी जाता ,वो माँ को कभी भी साथ ले कर नहीं जाता था |

उसे इस बात से लज्जा  होती थी कि उसकी माँ एक आँख वाली है | वो जल्दी – जल्दी अपनी पढाई पूरी किया,  और वो उस शहर को छोड़ दुसरे शहर में नौकरी करने चला गया |

उसी शहर में कुछ दिनों के बाद शादी भी कर ली और देखते देखते बच्चे भी हो गए | रतन अपने ज़िन्दगी  को खूब एन्जॉय कर रहा था,| लेकिन इन दिनों में वो कभी भी अपनी माँ को याद  नहीं किया | 

माँ तो बस इंतज़ार करती रहती कि रतन एक दिन ज़रूर आयेगा हमसे मिलने | लेकिन ऐसा नहीं हुआ | वो अब काफी बूढी हो गयी थी, और बीमार भी रहने लगी थी |

एक रविवार का दिन, रतन अपने घर पर ही बैठा कुछ ऑफिस का काम कर रहा था,  तभी घर की Door Bell बजी | बाहर उसी के बच्चे एक बुढिया का मजाक उड़ा रहे थे |

वो शोर गुल की  आवाज़ सुनकर बाहर निकल कर देखा तो वो बुढ़िया और कोई नहीं बल्कि  उसकी अपनी माँ थी, जिसको उसी के बच्चे मोहल्ले के बच्चो के साथ  मजाक उड़ा रहे थे |

रतन ने माँ को इस तरह उपने दरवाज़े पर देख  झल्लाता सा बोल पड़ा –. .माँ आप मेरा पीछा करते करते यहाँ तक पहुच गई |

माँ को अपने बेटे से ऐसी  उम्मीद नहीं थी | माँ ने तुरंत अपने को संभाल  कर धीरे से  कहा — ,,ओह, शायद मैं गलत पते पर आ गई | मुझे मेरे बेटे को और उसकी फॅमिली को देखने का बहुत  मन था | शायद यह गलत address है |

माँ तुरुन्त ही चुप चाप वापस चल पड़ी | कुछ दिन बीतने के बाद अचानक  रतन को अपने पुराने स्कूल का मेसेज मिला कि उसके पुराने स्कूल में Alumni function है और उसे आना है | वहाँ सभी पुराने दोस्त एक साथ मिलेंगे | वह मेसेज देखकर रतन बहुत खुश खुश हो गया , और मन बना लिया कि वो ज़रूर जायगा |.

अंततः  वो निर्धारित तिथि पर पुराने शहर पहुँचा और Alumni function में शरीक हो गया, वहाँ उसकी  माँ नहीं आयी थी |

Function समाप्त होने के बाद रतन वापस जाने ही वाला था कि उसके मन में विचार आया कि जब अपने पुराने शहर आए ही  है तो क्यों ना मुझे अपने पुराने घर  को देखना चाहिए और माँ से मिल लिया जाए |

ऐसा सोच कर वो अपने घर की  तरफ चल दिया | घर पर ताला लटक रहा था, वहाँ माँ नहीं थी | रतन ने पड़ोसियों से पता किया कि यहाँ ताला क्तोयों लगा है ?

उनलोगों ने बताया कि कुछ ही दिनों पूर्व उसकी माँ का देहांत हो गया | उस पडोसी ने एक ख़त  रतन को दिया और बोला कि आप की  माँ ने कहा था कि उसका बेटा स्कूल के फंक्शन में ज़रूर में आएगा और अगर यहाँ तक आए तो यह ख़त तुम को सौप दूँ |

रतन ने ख़त  को धीरे से खोला, उस ख़त  में लिखा था — . बेटा, मुझे मालूम है  कि तुम  स्कूल के फंक्शन     में ज़रूर आओगे और  मैं चाहती थी कि उस वक़्त तुमसे एक बार ज़रूर मिलूं, |

एक बात जो आज तक तुमको नहीं बताई थी ,वो बात तुमको बताना चाह रही थी | ,

लेकिन मैं इतनी बीमार हूँ कि शायद उस दिन तक नहीं जीवित नहीं रह पाऊँगी, इसीलिए इस ख़त के द्वारा वो बात कहने जा रही हूँ |

मैं जानती हूँ  कि तुम्हे हमेशा एक  आँख वाली माँ से दिक्कत रही है | पर मेरे लाल, यह तुम्हे मालूम नहीं है कि मैं एक आँख वाली माँ कैसे बनी ?

जब तुम छोटे थे तो एक दिन तुम्हारा एक्सीडेंट हो गया था और तुम्हारी एक आँख चली गई थी | मैं उस वक़्त अपनी एक आँख तुम्हे Donate कर दी थी |

चिठ्ठी पढ़ते – पढ़ते रतन  के आँखों से आँसू छलक गई और बूंद बूंद उस कागज़ के टुकड़े पर गिरने लगी |

यह सत्य है कि मनुष्य अपने ज़िन्दगी में हमेशा सिक्के के एक ही पहलु को देखता है और अगर गौर से दूसरा पहलू भी देख ले , तो बिमला देवी जैसी कितनी माँ को इस नरक की ज़िन्दगी जीने के लिए मजबूर ना होना पड़े |

हो सके तो खुशियाँ बाँटिये,  मुस्कान बाँटिये और सिर्फ माँ ही नहीं सभी से प्रेम कीजिए, ताकि  बाद में ज़िन्दगी भर के लिए पछतावा ना हो |

मैं तो यही कहता हूँ कि आप ज्ञान नहीं बाँटिये,  ज्ञान तो सब के पास है आप सिर्फ मुस्कान बाँटिये, इसकी बहुत ज़रुरत है |     

BE HAPPY… BE ACTIVE … BE FOCUSED ….. BE ALIVE,,

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Categories: motivational

3 replies

  1. Good expression. Keep it up. Thank you

    Liked by 1 person

  2. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Never think I have nothing…
    Never think I have everything…
    But, always think ..I have something
    and I can achieve anything…

    Liked by 1 person

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