रिश्तों की अहमियत

ज़िन्दगी में सब कुछ पाने की चाहत में हम एक ऐसे दौड़ में लग जाते है कि एक दिन ज़िन्दगी ही हाथ से निकल जाती है / और  अफ़सोस के सिवा कुछ भी नहीं रह जाता है / हमें  सिर्फ एक बार रुक कर अपने दिल से पूछना ज़रूर चाहिए .कि हम क्यों ज़िन्दगी में निरंतर दौड़ रहे है ? आखिर क्या पा लिया ज़िन्दगी भर दौड़ कर /

क्या हमें हकीकत में ख़ुशी मिली ? क्या प्यार मिला ? सुकून मिला दिल को, क्या आराम मिला ज़िन्दगी में ? इन सब चीजों से फिर भी वंचित है शायद / और  ज़िन्दगी की बहुत सारी  कीमती वक़्त भी हमारे हाथ से निकल गई  /

अब थोडा रुक जाना चाहिए और शांति की ज़िन्दगी जीना शुरू करना चाहिए / अब कब शुरू करेंगे, हम ज़िन्दगी को जीना / हम अपने ख्वाबो के पीछे दौड़ते सारी ज़िन्दगी निकाल देते है और  बदले में वो ख़ुशी नहीं प्राप्त होता है जिसकी कल्पना थी / यह सत्य है कि ज़िन्दगी के जिस पडाव पर हम खड़े है .. थोड़े दिन ही शेष बच गए  है ,अब अपने ख़ुशी के लिए तो जीना ही चाहिए /

   एक कहानी सुनी थी शायद हकीकत ही लगती है / एक लड़का जिसका नाम मोहन था इंजीनियरिंग में पढता था / उसने एक ख्वाब देखा कि वह  अमेरिका जा कर काम करेगा और  उसके पिता से भी ज्यादा पैसे कमाएगा / उसके पिता एक सरकारी दफ्तर में नौकरी करते थे / माध्यम वर्गीय परिवार था / ठीक ठाक पैसे मिल जाते थे / एक छोटा सा घर था, ज़िन्दगी बेहतर कट रही थी /

परन्तु  मोहन की  तो इच्छा थी कि वो अमेरिका जाकर ज्यादा पैसे कमाए, और ज्यादा सुख सुविधा से ज़िन्दगी बिताये / उसने खूब पढाई की , फिर अमेरिका गया / वह वहाँ  काम भी करने लगा / और  पैसे कमाने लगा / उसने सोचा कि कुछ साल यहाँ पैसे कमा कर फिर वापस भारत चला जाऊंगा /

पर वहाँ घर से दूर रहने पर अकेलापन लगने लगा / उसी दौरान उसे एक अमेरिकन लड़की से प्यार हो गया और  उसने शादी  भी कर ली / कुछ दिनों में उसके दो बच्चे भी हो गए , एक बेटा  और  एक बेटी / एक दिन उसने अपने माता पिता को फ़ोन किया और  कहा ,अब मैं भारत आ रहा हूँ, वहाँ की नौकरी छोड़ कर / माँ बाप खुश हो गए ,सोचा मैं तो रिटायर कर गया हूँ ,अपने बच्चो और  पोतो के बीच ज़िन्दगी अच्छी कटेगी / परन्तु कुछ दिन रहने के बाद उसकी पत्नी और बच्चो को यहाँ मन नहीं लगता था, इसलिए वापस  जाने की जिद करने लगे /

नहीं चाहते हुए भी अपनी पत्नी और  बच्चो को साथ लेकर वो अमेरिका वापस चला गया / कुछ दिन बाद खबर आई कि उसके माता पिता की तबियत बहुत ख़राब है , लेकिन छुट्टी नहीं मिलने के कारण नहीं आ सका / माता पिता को यह देख कर बहुत सदमा हुआ / वो मन ही मन दुखी रहने लगे /

इस बीच कुछ ऐसी घटना घटी कि मोहन अंदर से बिलकुल टूट गया / जब उसे पता चला कि उसके माता पिता दोनों हार्ट अटैक  के कारण एक साथ गुजर गए / घर में और  कोई व्यक्ति नहीं होने के कारण, किसी को भी पता नहीं चल सका और  मृत शारीर 15 दिनों तक घर में ही पड़ा रहा, इसका पता तब चला जब घर से दुर्गन्ध आने लगी / आस पड़ोस के लोग आनन् फानन में क्रिया कर्म कर दिया और  मोहन बाद में पहुँच पाया /  

अब वो फैसला कर चूका था कि वापस नहीं  जायेगा / लेकिन उसका परिवार यहाँ नहीं रहना चाहता था / उसकी बेटी एक अमेरिकन से शादी कर ली और  उसका बेटा और पत्नी भी वापस अमेरिका चली गई / अब वह  बिलकुल अकेला घर में रह गया / अब तो वो खुद ६० वर्ष का बुढा हो गया था /

रोज़ सुबह को मंदिर जाता,  और  भगवान के सामने पश्याताप करता / एक दिन वह उस मंदिर में बैठा सोचने लगा, कि क्या पाया ज़िन्दगी में ? जो कुछ भी मेरे पास है वो सब तो पिता के पास भी था, बस मेरे घर में सिर्फ एक कमरा ज्यादा है /

सिर्फ एक रूम के लिए अपनी ज़िन्दगी दांव पर लगा दी / वो अपने माता पिता का अंतिम संस्कार भी नहीं कर सका / हम ज़िन्दगी की एक अंधी दौड़ में लग जाते है, रिश्तो  की कदर नहीं कर पाते है और  ज़िन्दगी भर पछताते है /

अक्सर हम ज़िन्दगी में अपने बहुमूल्य रिश्तों को अपने झूठे शान और  अभिमान की आग में जला कर नष्ट कर देते है / इस संसार में देखने के लिए बहुत सारे ख़ूबसूरत स्थान है ,पर सबसे ख़ूबसूरत जगह है… बंद आँखों से अपने भीतर देखना..

तुम्हारी आँखे हमेशा पानी से भरी रहती है … मगर मैंने तुम्हे कभी रोते हुए नहीं देखा ,

तुमको देखकर ही मैं यह जान पाया हूँ, कि … आँसू बचाती हुई आँखे …बहती हुई आँखों से ज्यादा ख़ूबसूरत होती है ….

BE HAPPY… BE ACTIVE … BE FOCUSED ….. BE ALIVE,,

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4 thoughts on “रिश्तों की अहमियत

  1. Aaj ki zindigi mai log akele rahana chahetey hai, wo a sochetey hai ki agar akeley rahey to boojh kam hoga mata pita ko khana dena ya koi or kaam nahi karna parega. Hum chaar jaan hogey or aise ki zindigi goozare gaye, ghoom na phirna ,khana bananey ka jhanjaat khat( time pur) . Or mard bechara kuch kaar nahi sakta hai. Agar kuch boley too rai ka pahaar khara ho jayega. Agar patni k ghar saye koi aa gaya to dekhney layek hota hai, kaya khana khwogey ,kaya magadey. Agarus beeach kuch bool diye too y sunenane ko milegaa ki agar mere nahiyaar saye koi ata hai too aapko chaati pur saap lotenaye lagta hai.

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