बस चलता जाता है

बहुत लोग आज कल इसी में खुश है कि 2 वक़्त कि रोटी के लिए उनके पास काम (नौकरी) है, सुबह जल्दी उठकर ऑफिस चले जाना, रात को देर तक वापस घर आना और फिर थोड़ा TV देखकर सो जाना। यही हमारी दिनचर्या हो जाती है, दुनिया में क्या हो रहा है ये सोचने के लिए मेरे पास वक़्त नहीं है, ठीक ही तो  है इन सब झमेलों में कौन पड़े। कौन अपने ज़िन्दगी को खतरे में डाले। बस दाल रोटी खाओ ओर प्रभु के गुण गाओ वाली युक्ति हमें सही लगती है, सचमुच अब हमलोग देश दुनिया के प्रति insensitive होते जा रहे है। कुछ भी करने के पहले  हम सोचने लग जाते है कि इससे मेरा क्या लाभ होने वाला है, या फिर दुसरो का नुक्सान कितना हो सकता है, हम अपनी आँखों से नहीं दुसरो के चश्मे से परेशान  है..अपनी दुःख से नहीं दूसरों की ख़ुशी से परेशान  है..अगर इसी को जीना कहते है तो फिर हम भी जी रहे है…

नित्य रोज़ हमें हंसाता..रुलाता 

ज़िन्दगी है… बस चलता जाता है

एक धुंध से निकल.. उजाले की ओर

रोज़ नित नए.. सपने बुनता जाता है

हौसला देता है …  वो उड़ता पंछी

 हर सुबह जो तिनके लेकर  जाता है

ऐसा लगता है मानो सूरज से मिलकर

वह  प्रेम प्रकाश ले आता है..

कभी रुका नही ना रुक सकता है

जीवन है …बस चलता जाता है..

जो आज है.. वो कल  क्या होगा

ये राज़ तो.. समय ही बतलाता है

सच.. जीवन यूँ  ही चलता जाता है।

…बस चलता जाता है…

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